आरती का महत्व

जब भी किसी पूजा का आयोजन होता है तब अंत में आरती जरुर की जाती है. जिस भी देवता का

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श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम

ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि श्रृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत सती ।।1।। ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी

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ललितापंचकम्

प्रात: स्मरामि ललितावदनारविन्दं विम्बाधरं पृथुलमौक्तिकशोभिनासम् । आकर्णदीर्घनयनं मणिकुण्डलाढ़्यं मन्दस्मितं मृगमदोज्ज्वलभालदेशम् ।।1।।   प्रातर्भजामि ललिताभुजकल्पवल्लीं रक्तांगुलीयलसदंगुलिपल्लवाढ़्याम् । माणिक्यहेमवलयांगदशोभमानां पुण्ड्रेक्षुचापकुसुमेषुसृणीदधानाम् ।।2।।  

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दुर्गास्तुति:

श्रीमहाभागवत पुराण के अन्तर्गत वेदों द्वारा की गई दुर्गा स्तुति   श्रुतय ऊचु: दुर्गे विश्वमपि प्रसीद परमे सृष्ट्यादिकार्यत्रये ब्रह्माद्या: पुरुषास्त्रयो

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