देवीस्तुति:
अथ तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् – देवीस्तुति: देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके
Astrology, Mantra and Dharma
अथ तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् – देवीस्तुति: देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके
“भविष्य पुराण” में शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र का उल्लेख किया गया है. जो भी व्यक्ति अथवा साधक इस स्तोत्र का नियमित
चित्रा नक्षत्र का विस्तार कन्या राशि में 23 अंश(Degree) 20 कला(Minute) से आरंभ होकर तुला राशि में 6 अंश 40
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का सिंह राशि में विस्तार 13 अंश(Degree) 20 कला(Minute) से लेकर 26 अंश 40 कला तक माना
संवत 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में वात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई. फोड़े-फुंसियों
मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंकसकं विलासिलोकरंजकम् अनायकैकनायकं नमामि तं विनायम् नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायम् नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम्