गरुड़ पुराण – सातवाँ अध्याय
इस अध्याय में पुत्र की महिमा, दूसरे के द्वारा दिये गये पिण्डदान आदि से प्रेतत्व से मुक्ति की बात कही
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इस अध्याय में पुत्र की महिमा, दूसरे के द्वारा दिये गये पिण्डदान आदि से प्रेतत्व से मुक्ति की बात कही
महाराज उत्तानपाद की दो रानियाँ थी, उनकी बड़ी रानी का नाम सुनीति तथा छोटी रानी का नाम सुरुचि था। सुनीति
भगवान ब्रह्मा ने अपने पुत्र महर्षि कर्दम को सृष्टि की वृद्धि के लिए आदेश दिया। महर्षि कर्दम पिता की आज्ञा
भगवान विष्णु ने धर्म की पत्नी रुचि के माध्यम से नर और नारायण नाम के दो ऋषियों के रूप में
श्रीभगवानुवाच ज्ञानं परमगुह्यं मे यद्विज्ञानसमन्वितम् । सरहस्यं तदंग च गृहाण गदितं मया ।।1।। अर्थ – श्रीभगवान बोले – (हे चतुरानन!)
गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे केशव ! नरक से आया हुआ जीव माता के गर्भ में कैसे