बिल्वाष्टकम्
बिल्वाष्टकम् में बेल पत्र (बिल्व पत्र) के गुणों के साथ-साथ भगवान शंकर का उसके प्रति प्रेम भी बताया गया है.
Astrology, Mantra and Dharma
बिल्वाष्टकम् में बेल पत्र (बिल्व पत्र) के गुणों के साथ-साथ भगवान शंकर का उसके प्रति प्रेम भी बताया गया है.
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता, न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता। न जाया न विद्या न
1) ऊँ श्री अव्ययायै नम: 2) ऊँ श्री अच्युतायै नम: 3) ऊँ श्री अंशुभालिन्यै नम: 4) ऊँ श्री अपर्णायै नम:
शनि कई बार गोचरवश अथवा अपनी दशा/अन्तर्दशा में कष्ट प्रदान करते हैं, ऎसे में जातक को घबराने की बजाय शनि
तत: स तुलसीदास: सस्मार रघुनन्दनं । हनुमन्तं तत्पुरस्तात् तुष्टाव भक्त रक्षणं ।।1।। धनुर्वाणो धरोवीर: सीता लक्ष्मण संयुत: । रामचन्द्र
शनि की पीड़ा से मुक्ति के अकसर लिए दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने का परामर्श दिया जाता है.