आरती का महत्व

जब भी किसी पूजा का आयोजन होता है तब अंत में आरती जरुर की जाती है. जिस भी देवता का

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गणपतिस्तोत्रम

निर्विघ्नार्थं हरीशाद्या देवा अपि भजन्ति यम । मर्त्यै: स वक्रतुण्डोsर्च्य इति गाणेशसम्मतम ।।1।।   जगत्सृष्ट्यादिहेतु: सा वरा श्रुत्युक्तदेवता । गणानां

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श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम

ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि श्रृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत सती ।।1।। ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी

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