श्रेणी: Dharma
पिप्पलाद ऋषिकृत शनि स्तोत्रं
पिप्पलाद ऋषिकृत इस शनि स्तोत्र का पाठ करते समय बार-बार शनिदेव को प्रणाम करते रहना चाहिए. इस स्तोत्र का पाठ
गणपतिस्तोत्रम
निर्विघ्नार्थं हरीशाद्या देवा अपि भजन्ति यम । मर्त्यै: स वक्रतुण्डोsर्च्य इति गाणेशसम्मतम ।।1।। जगत्सृष्ट्यादिहेतु: सा वरा श्रुत्युक्तदेवता । गणानां
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम
ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि श्रृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत सती ।।1।। ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी
शुभ मुहूर्त
जन्म के समय से ही संस्कारों अथवा मुहूर्तों का चयन भिन्न-भिन्न कामों के लिए किया जाता है. जन्म के बाद
श्रीगणपतिस्तोत्रम
जो मनुष्य भक्ति तथा श्रद्धा भाव से इस गणपति स्तोत्रम का पाठ नियमित रुप से करता है, स्वयं लक्ष्मी जी