पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्
इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध
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इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध
1) ऊँ नमो भगवते श्रीकृष्णाय नम: । 2) ऊँ नमो भगवते सच्चिदानन्दाय नम: । 3) ऊँ नमो भगवते नित्यलीलाविनोदकृते नम:
श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेय नम: ।। ऋषिय ऊचु: कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं किमुदाहृतम् ।।1।। अर्थ ऋषियों
जटाधरं पाण्डुरंगं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ।। अर्थ पीले वर्ण की आकृति वाले, जटा धारण किए हुए,
पार्वती-मंगल में श्रीतुलसीदास जी ने देवाधिदेव भगवान् शंकर के द्वारा जगदम्बा पार्वती के कल्याणमय पाणिग्रहण का काव्यरूप में रसमय चित्रण
श्रावण मास माहात्म्य के पाठ एवं श्रवण का फल ईश्वर बोले – हे सनत्कुमार ! मैंने आपसे श्रावण मास का