पुरुषोत्तम सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

इस स्तोत्र की विशेषता यह है कि इसमें वेदरूपी कल्पवृक्ष के परिपक्व फल “निगमकल्पतरोर्गलितं फलं” अर्थात श्रीमद्भागवतमहापुराण के प्रथम स्कन्ध

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श्रीदत्तात्रेय वज्र कवच

श्रीगणेशाय नम: । श्रीदत्तात्रेय नम: ।। ऋषिय ऊचु: कथं संकल्पसिद्धि: स्याद्वेदव्यास कलौ युगे । धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं किमुदाहृतम् ।।1।। अर्थ ऋषियों

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पार्वती-मंगल

पार्वती-मंगल में श्रीतुलसीदास जी ने देवाधिदेव भगवान् शंकर के द्वारा जगदम्बा पार्वती के कल्याणमय पाणिग्रहण का काव्यरूप में रसमय चित्रण

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