महाभागवत – देवी पुराण – तीसवाँ अध्याय
इस अध्याय में देवताओं द्वारा देवी पार्वती की स्तुति, भगवान शंकर के तेज से षण्मुख कार्तिकेय का प्रादुर्भाव, देवताओं के
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इस अध्याय में देवताओं द्वारा देवी पार्वती की स्तुति, भगवान शंकर के तेज से षण्मुख कार्तिकेय का प्रादुर्भाव, देवताओं के
इस अध्याय में शिव-पार्वती का एकान्त-विहार है, पृथ्वी देवी का गोरूप धारण कर देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास जाना,
इस अध्याय में हिमालय द्वारा बारात का यथोचित सत्कार करना है, शिव-पार्वती के मांगलिक विवाहोत्सव का वर्णन है, शिव-पार्वती के
इस अध्याय में ब्रह्मा, विष्णु तथा रति द्वारा प्रार्थना करने पर भगवान शंकर का कामदेव को पुन: जीवित करना है,
इस अध्याय में हिमालय के घर में विवाह का उपक्रम प्रारंभ होना है, भगवान शंकर के यहाँ सभी देवताओं के
श्रीगणेशाय नम: श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान सुन्दरकाण्ड श्लोक शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं