राहु/केतु का भावों के अनुसार आत्म-पाठ फल

प्रथम भाव (लग्न) – अहं से आत्मा तक केतु लग्न में – आत्मा पूर्वजन्म में स्वयं पर काम कर चुकी

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जन्मकुंडली में पूर्व-जन्म के फल पहचानने की विधि

पराशर मुनि के अनुसार— “वर्तमान जन्म की कुंडली, पूर्व जन्म के कर्मों का ही फल है।” अर्थात् कुंडली में जो

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बृहत् पराशर होरा शास्त्र – अथ नाड़ीमुहूर्त्ताध्याय: 

बृहत् पराशर शास्त्र के 101वें अध्याय में नाड़ी मुहूर्तो के साथ अन्य कुछ महत्पूर्ण मुहूर्त्तों का भी वर्णन किया गया

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