कोरोना से डरो ना – Corona

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26 दिसंबर 2019 को जब ग्रहण लगा था तो वह मिथुन और धनु राशि में लगा था. मिथुन में राहु तो धनु राशि में केतु के साथ शनि, सूर्य, गुरु, बुध और चंद्र स्थित थे. भारत की कुंडली में यह दूसरे व आठवें भाव में लगा था. सातवें भाव से जनता को देखा जाता है और यहाँ सातवें भाव का स्वामी मंगल मिथुन राशि में है जिस पर ग्रहण लगा है. जिसका अर्थ है कि प्रजा से संबंधित परेशानियाँ हो सकती है. सातवें भाव में राहु है जिस पर से मंगल का गोचर हो रहा था. पाप ग्रह पर पाप ग्रह का गोचर शुभ नहीं माना जाता है. 

ग्रहों की यह स्थिति प्रजा में परेशानी दिखा रही है चाहे वह एन आर सी को लेकर हो या प्रजा में बीमारी को लेकर हो. धनु राशि में केतु का गोचर तो हो ही रहा था, साथ में गुरु के राहु/केतु अक्ष में आने से जीव पीड़ित हो गया क्योंकि गुरु जीव है और केतु विषाणु है. शनि भारत की कुंडली के लिए एक योगकारी ग्रह हैं लेकिन ग्रहण की चपेट में आने से वह उतना फल नहीं दे पाए जितना देना था चाहिए था. ग्रहण के समय भारत की कुंडली में चंद्रमा में शनि की दशा आरंभ हो चुकी थी. वैसे कहा गया है कि गोचर का शनि जब राहु/केतु के साथ गोचर करें या इन्हें देखे तब विषाणु से होने वाले संक्रमणकारी रोग होते हैं.

अच्छी बात ये रही कि 24 जनवरी को शनि, राहु/केतु अक्ष से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर गए जो कि इनकी अपनी राशि है. बावजूद इसके ग्रहण का प्रभाव तो होना ही था. जो हुआ भी क्योंकि पहले एन आर सी को लेकर दंगे-फसाद हुए और फिर कोरोना का हमला भारत में भी हो गया. जैसे ही मंगल, गुरु व केतु के साथ 7 फरवरी को धनु राशि में आए उसके बाद से कोरोना के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी. जैसा कि हमने पहले बताया कि गुरु जीव है और जब वह राहु/केतु के साथ आते हैं तब जीव की हानि होती है. मंगल व केतु का एक साथ होना शुभ संकेत बिलकुल भी नहीं माने जाते खासकर अग्नि तत्व राशि में. इसमें राहत की बात ये है कि मंगल अपनी उच्च राशि में 22 मार्च को प्रवेश कर जाएँगे तब इस संक्रमणकारी बीमारी से काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा. गुरु जो जीव हैं वह भी 30 मार्च को मकर राशि में प्रवेश कर जाएँगे भले ही यह गुरु की नीच राशि होगी लेकिन यहाँ गुरु का नीच भंग भी हो रहा है. 

2019 में नए संवत्सर की कर्क लग्न की कुंडली बनती है जिसमें छठे भाव में अन्तर्दशानाथ शनि केतु व गुरु के साथ स्थित हैं. संवत्सर का राजा जब शनि बने तब कहा गया है कि जनता जटिल रोग से पीड़ित रहेगी. इसी प्रकार सूर्य अगर संवत्सर का मंत्री बने तो उस साल भी लोग पेचीदा रोगों से परेशान रहेगें. संवत्सर 2076 में राजा शनि तो मंत्री सूर्य हैं.