बुध का दशाफल 

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बुध दशा का सामान्य फल

बुध जन्म कुंडली में यदि सामान्य अवस्था में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति अपने बंधु-बांधवों, गुरु तथा मित्रों के सहयोग से धन कमाता है. इन्हीं के सहयोग से व्यक्ति की कीर्ति चारों ओर फैलती है और व्यक्ति सुखी होता है. इस दशा में व्यक्ति दूत का काम करता है, सत्कर्म करता है और व्यापार से धन में वृद्धि करता है. वाहन आदि का सुख मिलता है, जनता का स्वामित्व मिलता है, सुन्दर आहार-विहार रहता है. यह दशा व्यक्ति को धन, सम्मान, वस्त्र तथा घर का लाभ कराती है. व्यक्ति सज्जनों की संगति में रहता है, कामक्रीड़ा का सुख मिलता है, सुयश में वृद्धि होती है और व्यक्ति के कार्यों की सिद्धि होती है. 

बुध की इस दशा में व्यक्ति सुन्दर स्त्री पाता है, आभूषण, विद्या, वस्त्र, पुत्र, भूमि आदि भी पाता है. बुध की इस दशा में व्यक्ति सुन्दर स्त्री के मुखारविन्द का रसपान करता है. व्यक्ति अनेक प्रकार के लीलाविलास से युक्त चीजों का भोग करता है. कई प्रकार के वैभवों तथा कोष की वृद्धि भी इस दशा में शीघ्र होती है. इस दशा में व्यक्ति के अर्थ की सिद्धि होती है. 

जन्म कुंडली में बुध अगर बली अवस्था में स्थित है तब व्यक्ति इस दशा में अच्छी विद्या ग्रहण करता है, विवेकशील होता है तथा उसके ज्ञान में वृद्धि होती है. विविध उद्यम शुरु करता है अथवा व्यवसाय आदि से धनार्जन करता है. कुछ जातक शिल्प आदि कार्यों में भी दक्षता हासिल करते हैं. इस दशा में व्यक्ति अनेकों उत्सव आयोजित करता है. व्यक्ति को गीत, संगीत तथा नृत्य आदि में रुचि रहती है और इन्हीं में वह सदा मग्न भी रहता है. हास-परिहास में विशेष रुचि रखता है. व्यक्ति व्यवहार कुशल होता है और उसके व्यवहार में भी विनय का भाव झलकता है. सज्जन व्यक्तियों का सदा आदर करने वाला होता है. आभूषणादि से संपन्न होता है तथा नये घर का निर्माण करता है. व्यक्ति को पत्नी सुख मिलता है तथा संतान की ओर से भी संतुष्ट रहता है. 

अगर बुध जन्म कुंडली में कमजोर अवस्था में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को कफ, पित्त तथा वायु संबंधी रोग हो सकते है. शारीरिक कष्ट के साथ धन की हानि भी होती है. बुध के बल का भली भाँति निरीक्षण करके ही फलकथन कहना चाहिए.  

 

बुध दशा का विशिष्ट फल 

अगर जन्म कुंडली में बुध अपनी उच्च राशि में स्थित है तब  इसकी दशा में धन का आगमन होता है, व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है, हर प्रकार के सुख पाता है, यश मिलता है और जनता का नायक बनता है. स्त्री-पुत्रादि का लाभ और धन आदि की प्राप्ति से सुखी होता है तथा विभिन्न उत्सवों का आयोजन करता है. 

 

उच्च राशि में स्थित बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी उच्च राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को महत्त्व प्राप्त होता है. शारीरिक सुखों में वृद्धि होती है. धन-धान्य की वृद्धि होती है. पशु लाभ होता है और मृदंगादि वाद्य यंत्रों में रुचि होती है. नृत्य-गान से संबंधित उत्सव भी आयोजित होते रहते हैं. बुध वाणी का कारक है इसलिए इस दशा में व्यक्ति की वाणी दूसरों को प्रभावित करने वाली होगी अथवा व्यक्ति अपने विचारों के द्वारा दूसरों पर अपनी छाप छोड़ने वाला होगा. 

 

मूल त्रिकोण राशि में बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी मूल त्रिकोण राशि में स्थित है तब सरकार की ओर से लाभ, सुखों की प्राप्ति, व्यक्ति को कीर्त्ति मिलती है, विद्या सुख और भोग-विलास की प्राप्ति होती है. इस दशा में व्यक्ति का रुझान पुराण आदि सुनने की ओर भी रहता है, इस प्रकार कहा जा सकता है कि जातक धार्मिक प्रवृत्ति की ओर भी झुकता है. 

 

स्वग्रही बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी राशि मिथुन या कन्या में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति धन-धान्य से संपन्न रहता है, वाणिज्य आदि से भी सुसंपन्न रहता है, भूमि लाभ, स्त्री लाभ तथा पुत्र रत्न की प्राप्ति भी होती है. व्यक्ति को मीठा भोजन करने का शौक भी इस दशा में हो सकता है. सुंदर वस्त्रों की प्राप्ति तथा आभूषण आदि का लाभ होता है. 

 

अतिमित्र राशि में स्थित बुध दशा का फल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी अतिमित्र राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति के महत्त्व में वृद्धि होती है. राज्याधिकारियों से मित्रता का दायरा बढ़ता है. धन की वृद्धि, स्त्री-पुत्रादि का सुख लाभ होता है. व्यक्ति अपने बंधु-बांधवों से भी इस दशा में मान-सम्मान पाता है. 

 

मित्र राशि में स्थित बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी मित्र राशि में स्थित है तब इसकी दशा में धन लाभ तथा विभिन्न सुखों की प्राप्ति होती है. व्यक्ति को कोई ना कोई उपाधि इस दशा में मिल सकती है. इस दशा में व्यक्ति को लिखने में रुचि हो सकती है चाहे वह किसी प्रकार का लेख हो. गद्य हो या पद्य हो किसी में भी रुचि हो सकती है. वर्तमान समय में लिखने के लिए बहुत से क्षेत्र मौजूद हैं जहाँ व्यक्ति अपनी प्रतिभा को निखार सकता है. 

 

सम राशि स्थित बुध का दशाफल  

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी सम राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को सुख होता है. धन-धान्य तथा वस्त्रादि की ओर से निश्चिंत रहता है लेकिन कभी-कभार विघ्न बाधाओं का सामना भी करना पड़ सकता है जिस कारण व्यक्ति अविवेकी भी हो सकता है. शारीरिक कष्ट भी झेलना पड़ सकता है. सरकार की ओर से भी कुछ कष्ट उठाने पड़ सकते है. 

 

आरोही बुध का दशाफल 

यदि आरोही बुध (नीच राशि से निकलकर उच्चता की ओर बढ़ता हुआ) जन्म कुंडली में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति यज्ञ कराता है, विभिन्न उत्सवों का आयोजन करता है. पशु आदि से लाभ होता है और आधुनिक समय में वाहन आदि का भरपूर सुख उठाता है. व्यक्ति नौकरी करें अथवा अपना व्यवसाय करें दोनों में ही उन्नति करता है. दिनोदिन चहुँमुखी विकास होता है. इस दशा में व्यक्ति परोपकार भी करता है. 

 

अवरोही बुध का दशाफल 

जन्म कुंडली में बुध अवरोही अवस्था में स्थित है तब अपनी दशा में व्यक्ति कष्ट उठाता है. दु:खों का सामना करना पड़ सकता है. व्यक्ति की बुद्धि का ह्रास होता है. पराई स्त्रियों की ओर आकर्षित होता है. अग्नि भय, चोर भय तथा सरकार की ओर से भी भय बना रहता है.   

 

शत्रु राशि स्थित बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी शत्रु राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति के शत्रु उस पर हावी रहते है. यह शत्रु प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष किसी भी रूप में हो सकते हैं. सरकार अथवा सरकारी अधिकारियों की ओर से भी शत्रु जैसा व्यवहार मिलता है. शिक्षा में अवरोध उत्पन्न होता है. हीन व्यक्तियों की सेवा करने की मजबूरी हो सकती है. कुभोजन की प्राप्ति होती है तथा स्त्री, पुत्र तथा धन की हानि भी उठानी पड़ सकती है. 

 

अतिशत्रु राशि स्थित बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी अतिशत्रु राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति को दुख तो झेलने ही होते हैं, साथ ही कई अन्य विपत्तियाँ भी मुँह बाये खड़ी रहती हैं. कार्य की हानि, व्यवसाय की हानि तथा अपने ही लोगों का विरोध जीवन की प्रगति को बाधित करता है. पुण्य कार्य करता है तब उसमें भी रुकावटें आती हैं. शुभ कामों का नाश होता है. 

 

नीच राशि स्थित बुध का राशिफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध अपनी नीच राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति में ज्ञानहीनता रहती है, व्यक्ति अविवेकी अथवा विवेकशून्य रहता है और इसी कारण उसके अपने उसका विरोध करते हैं. जिस पद पर व्यक्ति बना है उससे हट सकता है. बंधु-बांधवों के रोष का सामना करना पड़ सकता है. विदेश यात्रा कर सकता है लेकिन सुख नहीं होता अथवा घर से दूर रहना पड़ सकता है तथा सुख में कमी रहती है. 

 

उच्च ग्रह से युक्त बुध दशाफल 

जन्म कुंडली में बुध किसी उच्च ग्रह के साथ है तब इसकी दशा में व्यक्ति को सुखों की प्राप्ति होती है. भाग्योदय होता है तथा दिनोदिन भाग्य में वृद्धि होती जाती है. विद्या से लाभ होता है, अगर व्यापार करता है तो उसमें भी लाभ होता है. कोई कृषि कार्य करके आजीविका कमाता है तब इस दशा में कृषि कर्म से काफी लाभ होता है. 

 

नीच ग्रह से युक्त बुध का दशाफल 

यदि जन्म कुंडली में बुध किसी नीच ग्रह के साथ स्थित है तब इसकी दशा में बंधु-बांधवों का विनाश होता है. जिस पद-प्रतिष्ठा पर व्यक्ति बना हुआ है उसके भंग होने का भय रहता है. कार्य भंग होते हैं, कर्म का नाश होता है और कई प्रकार की व्याधियाँ व्यक्ति को घेरे रहती हैं.  

 

शुभ ग्रह से युक्त बुध का दशाफल 

जन्म कुंडली में बुध यदि किसी शुभ ग्रह के साथ स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति सरकार की ओर से भोग करता है अर्थात सुखी रहता है. कीर्त्ति बढ़ती है, स्त्री-पुत्र का सुख होता है. सरकार अथवा सरकारी अधिकारियों की ओर से संतोष बना रहता है. 

 

पाप ग्रह से युक्त बुध का दशाफल 

जन्म कुंडली में पाप ग्रह के साथ बुध बैठा है तब इसकी दशा में पाप फल ही ज्यादा मिलता है. हर तरह से कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. भूमि का विनाश होता है और उससे कष्ट मिलता है. 

 

शुभ ग्रह से दृष्ट बुध का दशाफल 

जन्म कुंडली में बुध पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि पड़ रही है तब इसकी दशा में व्यक्ति को प्रसिद्धि मिलती तथा उसकी कीर्त्ति फैलती है. विद्या के क्षेत्र में सम्मान मिलता है. भोग-विलासयुक्त जीवन तथा सरकार अथवा सरकारी अधिकारियों से सम्मान की प्राप्ति होती है. व्यक्ति विवेकशीलता का परिचय देता है और यशस्वी होता है. प्रताप बढ़ता है और चेहरे पर सदा कान्ति रहती है. 

 

अशुभ ग्रह से दृष्ट बुध का दशाफल 

जन्म कुंडली में बुध किसी पाप अथवा अशुभ ग्रह से दृष्ट है तब इसकी दशा में धन-धान्य की हानि होती है, स्वजनों तथा बंधु-बांधवों से अलगाव रहता है व उनसे व्यक्ति बिछड़ भी सकता है. विदेश यात्रा करनी पड़ सकती है लेकिन असंतुष्टि का भाव बना रहेगा. पद से हट सकता है तथा स्थान परिवर्तन का भय रहता है. गुलामी अथवा बंधन का डर लगा रहता है. कलह बना रहता है जिससे सदा अशांति का माहौल बना रहता है. 

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