लाल रँग का महत्व

लाल रँग को सूर्य और मंगल के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है और इस रँग का संबंध गर्मजोशी तथा अधिकार अथवा पॉवर से भी जोड़ा जाता है क्योंकि सूर्य तथा मंगल ये दोनों ही चीजें प्रदान करते हैं. सूर्य सरकार (क्योंकि सूर्य को ग्रहों में राजा की उपाधि दी गई है) तो मंगल सेनापति है और मंगल व्यक्ति के भीतर गर्मजोशी तथा ऊर्जा उत्पन्न करता है।

लाल रँग जोश, उत्साह, एनर्जी, आग, उत्तेजना, व्यक्ति कि इच्छाओं, व्यक्ति की भावनाओं, पॉवर तथा अॉथोरिटी का प्रतीक माना जाता है। अगर वास्तु शास्त्र की बात करें तो यह रँग दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करता है। लाल रँग सर्जरी, युद्ध, रक्तपात, विवाद, झगड़े तथा तबाही का भी रँग माना जाता है। अगर कोई लाल रँग का उपयोग करना चाहता है तो इसे “बुरी नजर” से बचाने के लिए उपयोग कर सकता है।

जो व्यक्ति लाल रँग को ज्यादा अहमियत देते हैं वह उदार हृदय, बड़े दिल वाले, नम्र और दूसरों को क्षमा करने वाले होते हैं, एक तरह से कहा जा सकता है कि सूर्य के सभी गुण इनमें विद्यमान रहते हैं(सूर्य राजा है तो एक अच्छा राजा सहृदय होता है)। लाल रँग हिम्मत और साहस देने वाला, कुछ करने की चाहत देने वाला, धैर्य रखने वाला और स्पष्टवादिता देने वाला होता है। जिन व्यक्तियों को लाल रँग बेहद प्रिय है वह साहसिक (adventurous) जीवन ज्यादा बिताते हैं अथवा उन्हें ऎसा जीवन ज्यादा प्यारा लगता है।

सर्दियों के दौरान लाल रँग काफी ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो सकता है क्योंकि यह गर्मी जो प्रदान करता है। जिन लोगों के घरों में खिड़कियाँ और रोशनदान दक्षिण दिशा की ओर हैं तब सर्दी के मौसम में कुछ समय के लिए उन्हें खोल देना चाहिए क्योंकि इससे लाल रँग घर के भीतर प्राकृतिक रुप से प्रवेश कर वातावरण में गर्माईश पैदा करेगा। हालाँकि लाल रंग घावों के उपचार के लिए बहुत अच्छा माना जाता है लेकिन ये रँग पागल व्यक्ति अथवा उन्मादी व्यक्तियों के लिए खतरनाक होता है।

जो व्यक्ति मूढ़ अथवा जड़ बुद्धि हैं या कुछ बेवकूफ हैं और जो व्यक्ति हीन भावना से ग्रसित रहते हैं, उनके लिए लाल रँग वरदान साबित होता है। जिन व्यक्तियों में आलस्य रहता है अथवा कुंठित रहते हैं या सुस्ती सदा हावी रहती है उन्हें लाल रँग ताजगी देने के साथ सक्रिय(active) बनाता है। जिन क्षेत्रों में गर्मी अधिक रहती है अथवा गरमी के मौसम में लाल रँग की अधिकता व्यक्ति के भीतर अनिद्रा (insomnia) पैदा कर सकता है, खुजली तथा फोड़े-फुंसी हो सकते हैं, उच्च रक्तचाप(High Blood Pressure) हो सकता है और इसी तरह कि कुछ बीमारियाँ होते देखी जा सकती हैं। गरमी के मौसम में अथवा गर्म इलाकों में शीत अथवा ठंडे रँगों का उपयोग ज्यादा करना चाहिए जैसे – बैंगनी (Voilet) रँग है, गहरा नीला (Indigo) रँग है अथवा नीला (Blue) रँग है, इनका इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए क्योंकि ये शीतलता प्रदान करके गरमी से होने वाली समस्याओं से परे रखते हैं।

व्यक्ति के अंदर की जो जीवनी शक्ति (Vitality) है उसमें लाल रँग वृद्धि करता है, ऊर्जा(Energy) बढ़ाता है और जैसा कि पहले बताया व्यक्ति की सक्रियता(Activity) में भी वृद्धि करता है। आर्मी के सिपाहियों के लिए यह रँग काफी उपयोगी माना जाता है क्योंकि युद्ध से जुड़ा रँग हैं, इसके साथ ही पुलिस, कसाई(Butcher), नाई (barber), सर्जन, दँत चिकित्सक (Dentist), प्रोफेसर, इंजीनियर, कारपेन्टर (Carpenter), कैमिस्ट, वेल्डर (Welder) और इलेक्ट्रिशियन आदि के लिए भी यह रँग उपयोगी होता है।

यह रँग हमारे मस्तिष्क को एक्टिव रखता है क्योंकि शरीर में रक्त(Blood) का तेज प्रवाह मस्तिष्क(Mind) के न्यूरॉन्स(Neurons) को सक्रिय बनाता है। लाल रँग उन स्थानों के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं जहाँ ऊर्जा की आवश्यकता अधिक रहती है जैसे डाँस हॉल आदि। जहाँ एक्टिव रहने की बात आती है अथवा उत्तेजना की बात आती है वहाँ भी लाल रँग काफी महत्व रखता है जैसे – जिमखाना अथवा अखाड़ा आदि स्थान। वैसे तो लाल रँग को आवेशपूर्ण तथा एक्टिव माना गया है तो इसे बेडरुम में सेक्स आदि क्रियाओं के लिए उचित माना जा सकता है लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखें कि यह अनिद्रा का कारण भी बनता है इसलिए दोनों ही स्थिति में सोच-विचारकर तालमेल बिठाना चाहिए।  

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