शुक्र पर्वत अथवा शुक्र क्षेत्र

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हाथ में अँगूठा की जड़ के नीचे का पूरा क्षेत्र जो आयु रेखा से घिरा हुआ रहता है वह शुक्र पर्वत कहलाता है। यूनान में शुक्र को “सुन्दरता की देवी” कहा गया है। जिन व्यक्तियों के हाथ में शुक्र पर्वत श्रेष्ठ स्तर का रहता है वह सुन्दर होने के साथ पूर्णतया सभ्य होते हैं। ऎसे व्यक्तियों का स्वास्थ्य भी काफी अच्छा रहता है। व्यक्ति के व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरे लोगों पर भी अच्छा पड़ता है। ऎसे व्यक्ति में साहसी और हिम्मत वाले होते हैं। अगर किसी व्यक्ति के हाथ में यह पर्वत ज्यादा विकसित नहीं होता तब ऎसे व्यक्ति दब्बू अथवा कायर स्वभाव वाले होते हैं।

जिनके हाथों में शुक्र पर्वत आवश्यकता से अधिक विकसित होता है वे व्यक्ति भोगी तथा विपरीत लिंगी के प्रति लालायित रहते हैं। यदि किसी के हाथ में शुक्र पर्वत है ही नहीं तब ऎसा व्यक्ति वीतरागी (Self Realized), साधु तथा सन्यासी जैसा जीवन जीता है। गृहस्थ जीवन में उसकी रुचि ना के बराबर रहती है। यदि किसी के हाथ में शुक्र पर्वत का विकास पूरी तरह से हुआ है लेकिन उसकी मस्तिष्क रेखा संतुलित नहीं है तब ऎसा व्यक्ति प्रेम व भोग के क्षेत्र में बदनाम हो जाता है। ऎसे व्यक्तियों में प्रेम वासना की अधिकता रहती है।

किसी भी व्यक्ति के हाथ में शुक्र पर्वत का उभार उसे तेजस्वी तथा लावण्यमान बना देता है। इनके चेहरे में कुछ ऎसा आकर्षण रहता है कि जिससे लोग उनकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते हैं। मुसीबतों को भी ये चेहरे पर आने नहीं देते और दूसरों के सामने मुस्कुराते रहते हैं। ये अपने कार्यों व कर्त्तव्यों के प्रति पूरी तरह से सजग रहते हैं। सुन्दर तथा कलात्मक वस्तुओं के प्रति इनका रुझान स्वाभाविक सी बात है क्योंकि बली शुक्र पर्वत कला का कारक है।

यदि किसी की हथेली खुरदरी है और शुक्र पर्वत बहुत ज्यादा विकसित है तब ऎसा व्यक्ति भोगी व ऎय्याश होता है, ऎसे व्यक्ति भौतिक सुखों के दास होते हैं। लेकिन अगर हथेली चिकनी व मुलायम है और शुक्र पर्वत पूर्ण रुप से विकसित हो तब ऎसा व्यक्ति एक सफल प्रेमी तथा उत्कृष्ट कवि होता है।

किसी भी व्यक्ति के हाथ में शुक्र पर्वत की अनुपस्थिति उसके जीवन में दु:ख तथा परेशानियाँ उत्पन्न करती है। यदि शुक्र सामान्य रुप से विकसित है तब ऎसा व्यक्ति सुन्दर, शुद्ध रुप से प्रेम भाव रखने वाला और संवेदनशील होता है। अगर किसी व्यक्ति के हाथ में शुक्र पर्वत का झुकाव मंगल पर्वत की ओर है तब वह व्यक्ति प्रेम के मामलों में कोमल नहीं होता और इनके जीवन में बलात्कार की घटनाएँ जरुरत से ज्यादा रहती हैं।

जो शुक्र प्रधान व्यक्ति हैं उन्हें विशेष रुप से गले की बिमारियाँ हो सकती हैं। ऎसे व्यक्ति ईश्वर पर आस्था नहीं रखते। इनके जीवन में मित्रों की संख्या बहुत अधिक रहती है और ये अपने जीवन में प्रेम व सौन्दर्य को ही अपना सब कुछ समझते हैं। यदि अंगूठे का सिरा कोणदार हो और शुक्र पर्वत विकसित हो तब ऎसा व्यक्ति कलात्मक रुचि वाला होता है। यदि अंगूठे का सिरा वर्गाकार हो तब ऎसा व्यक्ति समझदार और तर्क से काम लेने वाला होता है और अंगूठे का फैला हुआ सिरा व्यक्ति में दयालुता की भावना भर देता है।   

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