मस्तिष्क रेखा से जुड़े तथ्य

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मस्तिष्क रेखा पर द्वीप चिन्हों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है लेकिन इनका विचार करने पर यह ध्यान देना आवश्यक है कि किस आयु में किस चिन्ह का क्या प्रभाव पड़ने वाला है. वर्तमान समय में यदि द्वीप चिन्ह बना है तो यह हर रेखा को कमजोर बनाता है. द्वीप को दुर्भाग्य सूचक माना गया है.

मस्तिष्क रेखा का एक लगातार जंजीर के रुप में बना होना मानसिक दुर्बलता का द्योतक है. यह कमजोर स्वास्थ्य की खराबी से होती है और उसका दिमाग पर कुप्रभाव पड़ता है. इस मानसिक निर्बलता के साथ-साथ यदि नाखूनों में छोटे चन्द्र हों या चन्द्र बिलकुल ना हो तो यह प्रकट होता है कि व्यक्ति के शरीर में खून की कमी है जिससे उसके मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है. शारीरिक कमजोरी भी होती है और रक्त वितरण में खराबी होने के कारण दिमाग में खून ठीक तरह से नहीं पहुँच पाता है. परिणामस्वरुप व्यक्ति में इच्छा शक्ति की कमी हो जाती है. इसलिए वह अध्ययन अथवा अन्य किसी भी काम में अपना ध्यान केन्द्रित करने में असमर्थ रहता है.

यदि ऎसी मस्तिष्क रेखा हथेली में बहुत ऊँचे पर स्थित हो तब और अधिक खराब लक्षण होते हैं जिसके कारण जातक आधा पागल तक हो जाता है. यदि जंजीरनुमा मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा से बहुत फासले से आरंभ होती है तो मस्तिष्क की विकृति लाइलाज बन जाती है. ऎसे योग में मानसिक उत्तेजना इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति अपना होश-हवास तक खो बैठता है और दूसरों के लिए खतरनाक बन जाता हैं. जब जंजीराकार मस्तिष्क रेखा एकदम नीचे की ओर मुड़ जाती है तब व्यक्ति का चित्त(Mind) खिन्न(Irritating) रहता है और उसे निराशा तथा हीनता के दौरे आते रहते हैं तब ऎसी दशा में वह एकान्तवासी हो जाता है और ऎसे में उसके आत्महत्या करने का भय होता है.

मस्तिष्क रेखा पर द्वीपों के प्रभाव का विचार करते समय यह भी देखना आवश्यक है कि द्वीप किस अंगुली के नीचे पड़ रहे हैं. यदि द्वीप रेखा के आरंभ पर पहली अंगुली अर्थात बृहस्पति क्षेत्र के नीचे पड़ रहे हैं तो यह पता चलता है कि व्यक्ति अपने जीवन के आरम्भिक भाग में मानसिक और बौद्धिक निर्बलता का शिकार रहा होगा. उसमें इच्छाशक्ति और महत्वाकाँक्षा की बहुत कमी रही होगी.

यदि यह द्वीप चिन्ह दूसरी अथवा मध्यमा अंगुली अर्थात शनि क्षेत्र के नीचे बने हो तो जातक सिर दर्द, उदासीनता, चिन्ताकुलता का शिकार हो सकता है. यदि रेखा निर्बल हो और उसमें से सूक्ष्म रेखाएँ निकलती हो तो यह समझना चाहिए कि जातक मानसिक विकृतता से कभी मुक्ति नहीं पा सकता है.

यदि द्वीप चिन्ह तीसरी अथवा अनामिका अंगुली अर्थात सूर्य क्षेत्र के नीचे हों तो यह समझना चाहिए कि आँखों में कमजोरी होगी. यदि द्वीप चिन्ह बहुत गहरा हो तो व्यक्ति अन्धा भी हो सकता है.

यदि द्वीप चिन्ह चौथी अथवा सबसे छोटी अंगुली अर्थात बुध क्षेत्र के नीचे बना है तो यह समझना चाहिए कि वृद्धावस्था में व्यक्ति मस्तिष्क की निर्बलता और चिन्ताकुलता का शिकार होगा. यदि द्वीप चिन्ह बहुत गहरा हो तो अधिक मानसिक परिश्रम या चिन्ता करने से व्यक्ति पागल भी हो सकता है. मस्तिष्क रेखा पर द्वीप चिन्हों की स्थिति से यह भी जाना जा सकता है कि उनका कुप्रभाव जातक को किस अवस्था में अनुभव हो सकता है.

पहली अंगुली के नीचे द्वीप चिन्ह का कुप्रभाव 12 वर्ष की अवस्था तक रहता है, दूसरी अंगुली के नीचे 42 वर्ष तक, तीसरी अंगुली के नीचे 49 से 63 वर्ष तक और चौथी अंगुली के नीचे द्वीप चिन्ह का प्रभाव 90 वर्ष की अवस्था से जीवन अन्त तक रहता है.

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