मस्तिष्क रेखा का आरंभ स्थान

इस लेख में हम पाठकों को मस्तिष्क रेखा के आरंभ स्थान के बारे में  बताएंगे. मस्तिष्क रेखा हाथ में तीन प्रकार से आरंभ होती है. पहली प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा के अंदर से होता है. दूसरी प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा से जुड़कर होता है और तीसरी प्रकार की जीवन रेखा का आरंभ जीवन रेखा के बाहर से होता है.

 

पहली प्रकार की मस्तिष्क रेखा – First Type Of Head Line

पहली प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा के अंदर से होता है. इस रेखा को सबसे अधिक अनिश्चित रेखा माना गया है. यह रेखा व्यक्ति को आवश्यकता से अधिक आवेशात्मक, सावधान और डरपोक बनाती है. ऎसी रेखा के हाथ का स्वामी शीघ्र गड़बड़ा जाने वाला, सरलता से उत्तेजित हो जाने वाला होता है. व्यक्ति में अपने ऊपर या अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने की क्षमता नहीं होती. व्यक्ति जरा-जरा बात पर निराश हो जाता है, जरा सी बात पर आसमान सिर पर उठा लेता है और चूहे के बिल को पहाड़ सा बना देता है. ऎसे व्यक्ति सदा अपने आपको मुसीबत में पाते हैं. साधारण बातों पर भी दूसरों से झगड़ते फिरते हैं. छोटी से छोटी बात पर भी उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है और कई दिनों तक वह सहज नहीं हो पाते हैं.

यदि उपरोक्त पहली प्रकार की मस्तिष्क रेखा हथेली में आगे बढ़्ते हुए सीधी हो जाए तो व्यक्ति कुछ समय बाद अपने बौद्धिक और मानसिक विकास से अपने आवेश विकार का दमन करने की क्षमता प्राप्त कर लेता है. लेकिन यदि मस्तिष्क रेखा कलाई की ओर अथवा चन्द्र क्षेत्र की ओर मुड़ जाए तो उसके स्वभाव के विकारों में अधिक वृद्धि हो जाती है.

यदि मस्तिष्क रेखा निर्बल हो अथवा उसमें से बालों के समान सूक्ष्म रेखाएँ निकलती हों तो व्यक्ति किसी प्रकार के मस्तिष्क विकार का शिकार हो जाता है और तब उसके जीवन पर नियंत्रण रखना बहुत जरुरी हो जाता है. यदि इस प्रकार के योग के साथ ऊपर जाने वाली मुख्य रेखाएँ जैसे भाग्य रेखा आदि हथेली के मध्य में ही कमजोर पड़ जाएँ तब मस्तिष्क विकार होना निश्चित होता है. ऎसी रेखा अधिकतर ऎसे हाथों में पाई जाती है जो मद्यपान अधिक करते हैं और हर प्रकार से अनियंत्रित जीवन जीते हैं.

जिन व्यक्तियों के हाथों में ऊपर जाने वाली रेखाएँ बली अवस्था में होती हैं तब भी ऎसी मस्तिष्क रेखा का प्रभाव बिलकुल बदला हुआ नहीं कहा जा सकता क्योंकि ऎसे व्यक्ति भी समय-समय पर मद्यपान करने के शौकीन बन ही जाते हैं और नशीले द्रव्यों के सेवन की आदत पड़ ही जाती है. मस्तिष्क रेखा जहाँ से आरंभ होती है वहाँ अग्निपूर्ण मंगल का क्षेत्र भी पड़ता है इसलिए इस मंगल के प्रभाव के कारण ऎसा होता है.

हथेली में जहाँ मस्तिष्क रेखा का अंत होता है उस तरफ मंगल का दूसरा क्षेत्र पड़ता है जो मानसिक नियंत्रण प्रदान करता है. इसलिए जब प्रथम मंगल क्षेत्र से यह रेखा सीधी होकर दूसरे मंगल क्षेत्र में प्रवेश करती है तब इसका फल बदल जाता है और कहा गया है कि ऎसा जातक अपने बाद के जीवन में अपना मानसिक संतुलन प्राप्त कर लेता है. जो रेखा दूसरे मंगल क्षेत्र में प्रवेश नहीं करती और पहले ही नीचे की ओर मुड़ जाती है तो वह उसके मानसिक संतुलन के प्रभाव से वंचित हो जाती है और इसी से जातक में मानसिक अस्थिरता तथा अन्य कई प्रकार के मानसिक विकार उत्पन्न हो जाते हैं.

 

जीवन रेखा से जुड़ी मस्तिष्क रेखा – Head Line Starts With Life Line

यह दूसरे प्रकार की मस्तिष्क रेखा कही जाएगी जो आरंभ स्थान से जीवन रेखा से जुड़ी होती है और उसी से निकलती हुई दिखाई देती है. जब भी किसी हाथ में इस प्रकार की जीवन रेखा होती है तब ऎसा व्यक्ति अत्यधिक भावुक होता है और वह जीवन के बहुत से फैसले दिमाग की बजाय दिल से ले लेता है. व्यक्ति के स्वभाव में सतर्कता की भावना होती है और आत्मविश्वास की कमी होती है. ऎसी मस्तिष्क रेखा का होशियार से होशियार व्यक्ति अपने गुणों और क्षमताओं को पर्याप्त नहीं समझता है.

जब इस प्रकार की रेखा नीचे की ओर मुड़ जाए तो भावुकता और भी अधिक बढ़ जाती है. रेखा की ऎसी बनावट अधिकतर कलाकारों व चित्रकारों के हाथों में पाई जाती है. इसके विपरीत यदि जीवन रेखा से मिली हुई मस्तिष्क रेखा सीधी दूसरे मंगल क्षेत्र की ओर जाती है तो व्यक्ति भावुक होते हुए भी अपनी मान्यताओं पर चलने का साहस रखता है. उसके कार्य कलापों में भी भावुकता का प्रभाव कम होता है. जिनके हाथों में यह रेखा नीचे की ओर मुड़ जाती हैं उनके कार्य कलापों में भावुकता का प्रभाव ज्यादा होता है. यह मस्तिष्क रेखा जितनी अधिक सीधी होगी उतना ही अधिक व्यक्ति में कार्य सम्पन्न करने की दृढ़ता आ जाती है.

यदि यह मस्तिष्क रेखा बिलकुल ही सीधी-सीधी दूसरे मंगल क्षेत्र तक पहुँच जाए तो व्यक्ति अत्यधिक दृढ़ संकल्प हो जाता है. ऎसे में वह अपनी भावुकता और आवेशात्मक स्वभाव पर पूर्ण रूप से नियंत्रण रखने में समर्थ होता है. जिस कार्य को वह अपना कर्तव्य समझकर करना चाहता है उसे बिना किसी संकोच के पूरा करता है. इन दो प्रकार की मस्तिष्क रेखाओं, एक वह जो नीचे की ओर मुड़ जाती है तो दूसरी वह जो सीधा जाती है, के व्यक्तियों के स्वभाव व गुणों को पहचानने में भी अकसर लोग गलती कर देते हैं.

प्राय: ऎसा होता है कि जीवन रेखा से जुड़ी हुई मस्तिष्क रेखा अपने अन्त में दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है और जब यह शाखाएँ एक-दूसरे के बराबर होती है तो जातक निर्णय लेने में संकुचित हो जाता है. वह समझ ही नहीं पाता कि दिमाग से काम ले या बात को व्यवहारिक दृष्टि से देखे या कल्पना का सहारा ले. ऎसे जातक के लिए अच्छा यह है कि वह उस धारणा के अनुसार काम करे जो उसके मन में पहले आई हो.

यदि यह मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत की ओर साधारण रुप से मुड़ती है तो इसका अर्थ है कि जातक ने अपनी कल्पनाशीलता पर नियंत्रण खोया नहीं है. वह कल्पनाशक्ति का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर ही करता है और कल्पनाओं में भटकता नहीं है लेकिन यदि यही मस्तिष्क रेखा दूर तक चन्द्र पर्वत में चली जाए तो फल कथन बिलकुल उलटा हो जाता है. ऎसे में व्यक्ति कल्पनाशक्ति का गुलाम बनकर रह जाता है और अस्थिरता उसका स्वभाव बन जाती है. व्यक्ति में सनक सी आ जाती है और जैसी मन में तरंगे उठती है वैसा ही काम करता है. ऎसे व्यक्ति बहुत कम सफलता पाते हैं.

यदि नीचे की ओर मुड़ने वाली मस्तिष्क रेखा एकदम झुकाव के साथ कलाई की ओर पहुँच जाती है तो इस योग वाले व्यक्ति  विकृत मस्तिष्क के हो जाते हैं. ये अपने साथियों से अलग हो जाते हैं. संसार से विमुख होकर एकान्तवासी हो जाते हैं अथवा ऎसे व्यक्ति आत्महत्या कर के संसार का परित्याग कर देते हैं. अपने अत्यन्त आवेशात्मक और निराशावादी स्वभाव के कारण जीना दूभर कर लेते हैं.

इस प्रकार की एक ओर मस्तिष्क रेखा होती है जो कुछ भिन्नता लिए होती है और यह रेखा गहरा झुकाव लेकर कलाई की बजाय दूर तक चन्द्र क्षेत्र में चली जाती है. ऎसी रेखा में कोई द्वीप न हो या उस पर नक्षत्र का चिन्ह ना हो तो जातक आत्महत्या की ओर प्रेरित नहीं होता है. लेकिन ऎसे जातक भी कुछ विकृत मस्तिष्क के और निराशावादी होते हैं पर ये जीवन से इतना हताश नहीं होते कि आत्महत्या ही कर बैठें.

 

जीवन रेखा से पृथक मस्तिष्क रेखा – Head Line Starts Independently

ज्यादातर हाथों में मस्तिष्क रेखा से जुड़ी हुई होती है, कोई ज्यादा जुड़ी तो कई रेखाएँ आरंभ में थोड़ी सी जुड़ी होती हैं लेकिन कुछ हाथ ऎसे भी सामने आते हैं जिनमें जीवन रेखा से कुछ दूरी से मस्तिष्क रेखा का आरंभ होता है. जिन हाथों में मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा से अलग होकर होता है तो उसका फल बदल जाता है. जब इन दोनों रेखाओं के बीच का फासला अधिक ना हो तो यह एक अच्छा योग माना जाता है. इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के विचार स्वतंत्र रहते हैं, वह अपने दिल की बजाय दिमाग से फैसले ज्यादा लेता है.

व्यक्ति में वैचारिक स्वतंत्रता होने के साथ शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता उत्पन्न होती है और जीवन को सफलतापूर्वक पूरा करने का मानसिक साहस भी होता है. यदि यह रेखा हथेली में सीधी भी चली जाए तो भी व्यक्ति दूसरों के ऊपर प्रभाव रखने वाला होता है. ऎसा व्यक्ति यदि जन-जीवन में भाग ले तो बहुत सफलता प्राप्त करता है. ऎसे व्यक्तियों की विचारशक्ति बहुत तेज होती है और वे कठिन समस्याओं का हल भी क्षण भर में निकाल लेते हैं.

यदि मस्तिष्क रेखा हथेली में सीधी ना जाकर नीचे की ओर मुड़ने वाली हो तो उसका प्रभाव बदल जाता है. ऎसे में व्यक्ति अनिश्चित मन का हो जाता है और कुशाग्र बुद्धि होने पर भी मन में उठती तरंग के अनुसार काम करता है. यदि उसके काम करने का मूड नहीं बनता है तो वह यूँ ही बेकार में समय नष्ट कर के अपना जीवन विफल बना बैठता है.

जिन व्यक्तियों के हाथों में यह पृथक मस्तिष्क रेखा अन्त में कुछ ऊपर की ओर उठती हो या दूसरे मंगल के क्षेत्र में प्रवेश कर के ऊपर की ओर उठती हो तो ऎसे जातक स्वयं नियुक्त नेता होते हैं और जन आंदोलन चलाने वाले होते हैं. ये अपने ध्येय की प्राप्ति के लिए अपना घर, परिजनों का स्नेह तथा अपना सर्वस्व बलिदान करने को तत्पर रहते हैं.

यदि किसी हाथ में मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा से अधिक फासले पर स्थित है तब व्यक्ति में सतर्कता व आवेश की बहुत कमी होती है. ऎसे योग का प्रभाव मस्तिष्क रेखा के जीवन रेखा से जुड़ी होने के प्रभाव से बिलकुल उलटा होता है. बहुत अधिक फासला होने पर व्यक्ति में बहुत जल्दबाज होने की आदत हो जाती है. वह कार्य क्रमानुसार अथवा ठीक तरीके से नहीं कर पाता है. वह ऎसे कार्य करता है जिनमें बदनामी होती है. अपनी योजनाओं को सदा बदलते रहना इनकी आदत होती है.

ऎसे व्यक्तियों के सिर में रक्त बहाव ज्यादा रहता है जिससे उनमें उत्तेजना बढ़ जाती है. ऎसे लोग स्थिर नहीं रहते और बेचैन रहने के कारण ये अपनी नींद तक खो देते हैं. यदि ऎसी मस्तिष्क रेखा पर द्वीप बना हो या रेखा चौड़ी अथवा टूटी-फूटी हो अथवा उसमें से बालों के समान सूक्ष्म रेखाएँ निकल रही हो तो जातक के पागल होने की संभावना रहती है. अधिक उत्तेजित अवस्था में आकर वह किसी की हत्या भी कर सकता है.

उत्तम मस्तिष्क रेखा वह होती है जो जीवन रेखा से अधिक फासले पर ना हो और इसका आरंभ बृहस्पति क्षेत्र से हो या फिर इसकी कोई शाखा बृहस्पति क्षेत्र से आरम्भ होती हो. इस प्रकार की रेखा का स्वामी महत्वाकाँक्षी होता है. रेखा किसी भी प्रकार की हो उपरोक्त दिए विवरण के आधार पर बारीकी से निरीक्षण कर के ही किसी नतीजे पर पहुँचना चाहिए.

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