मस्तिष्क रेखा

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इस लेख में हम मस्तिष्क रेखा के विषय में चर्चा करेगें और मस्तिष्क रेखा के बारे में हस्तरेखा शास्त्री “कीरो” की विचारधारा के अनुसार पाठकों को जानकारी दी जाएगी. इस लेख में मस्तिष्क रेखा के विषय में कुछ जानकारी दी जाएगी और धीरे-धीरे कर मस्तिष्क रेखा से संबंधित सभी बातों का अध्ययन आने वाले लेखों में किया जाएगा.

हाथ में जीवन रेखा, भाग्य रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा को स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है, लेकिन कई हाथों में भाग्य रेखा लुप्त भी हो सकती है, फिर भी ये रेखाएँ स्पष्ट रुप से पहचानी जा सकती है बस हर हाथ के अनुसार इनकी आकृतियाँ भिन्न होती हैं. मस्तिष्क रेखा हाथ में जीवन रेखा से मिलती हुई निकलती है या फिर जीवन रेखा के पास से निकलती हुई नजर आती है. कई बार बृहस्पति क्षेत्र से भी यह रेखा निकलती हुई नजर आती है. इस उदगम स्थान को लेकर भी भिन्न-भिन्न फलकथन कहे जाते हैं.

मस्तिष्क रेखा को हमेशा एक महत्वपूर्ण रेखा मानकर उसका अध्ययन किया जाना चाहिए क्योंकि व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता का विचार इसी रेखा द्वारा किया जाता है. मस्तिष्क रेखा के अध्ययन के लिए व्यक्ति के दोनों हाथों का ध्यानपूर्वक निरीक्षण किया जाना चाहिए क्योंकि बाएँ हाथ(Left Hand) से व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्तियों का पता चलता है और दाएँ हाथ(Right Hand) में व्यक्ति के वो गुण दिखाई देते हैं जो व्यक्ति ने अपने कार्य कलापों और प्रयासों द्वारा विकसित किए हैं इसलिए बाएँ हाथ तथा दाएँ हाथ की बनावट में जो अन्तर दिखाई देते हैं उन्हें ध्यान में रखकर फलकथन करना चाहिए.

मस्तिष्क रेखा को ध्यान से देखते हुए यह भी नोट करें कि इस रेखा का अन्त किस प्रकार से हो रहा है तभी यह कहा जा सकता है कि बुद्धि का विकास किस दिशा में हो रहा है. जैसे – यदि बाएँ हाथ में मस्तिष्क रेखा मुड़कर नीचे की ओर जा रही है लेकिन दाएँ हाथ में यह रेखा सीधी करतल(हथेली) में एक ओर से दूसरी ओर सीधी जा रही है तो इसका अर्थ हुआ कि व्यक्ति अपनी जन्मजात प्रवृत्तियों के अनुसार नहीं चला है अर्थात जो प्रवृति उसकी जन्मजात थी, बड़े होते-होते वह बदल गई हैं. परिस्थितियों के वशीभूत होकर व्यक्ति ने अपने आपको अधिक व्यवहारिक और संतुलित मस्तिष्क का बना लिया है जिससे कि वह वैसी परिस्थिति का सामना कर सके.

यदि उपरोक्त कथन के विरुद्ध मस्तिष्क रेखा की बनावट दाएँ हाथ में ठीक बाएँ हाथ की रेखा के समान ही है तो इसका अर्थ हुआ कि व्यक्ति के प्रारम्भिक जीवन में उसके मस्तिष्क पर कोई विशेष बोझ नहीं पड़ा और जन्मजात प्रवृत्तियों के अनुसार ही उसके मस्तिष्क का विकास होता रहा.

यदि बाएँ हाथ में मस्तिष्क रेखा अपने अन्त स्थान पर दो भागों में बँट गई है और एक भाग नीचे की ओर मुड़ जाता है व दूसरा भाग सीधा जा रहा हो, इधर दाएँ हाथ में मस्तिष्क रेखा एकदम सीधी हो तो इसका अर्थ हुआ कि व्यक्ति ने अपने माता-पिता से विरासत में दो प्रकार के स्वभाव पाए थे – एक कल्पनाशील तो दूसरा व्यवहारिक लेकिन बाद में परिस्थितियों के वशीभूत होकर केवल व्यवहारिक प्रवृति का विकास व्यक्ति में हुआ जो कि व्यवसाय अथवा विज्ञान की दिशा में था. इसका एक अर्थ यह भी निकलता है कि व्यक्ति के माता-पिता का स्वभाव एक-दूसरे के विपरीत था. एक मतानुसार हस्त परीक्षण करते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि पुरुष अपनी माता की प्रवृत्तियों का अनुसरण करते हैं तो स्त्रियाँ अपने पिता की.

यदि व्यक्ति के बाएँ हाथ में मस्तिष्क रेखा दो भागों में बँट गई है और ऊपरी भाग वाली रेखा सीधी जा रही है तब इसका अर्थ होगा कि माता स्वभाव में पिता से अधिक व्यवहारिक थी. यदि यही बनावट दाएँ हाथ में स्पष्ट रुप से पाई गई हो तब कहा जाएगा कि व्यक्ति ने पिता से अधिक माता की प्रवृत्तियों को अपने आप में विकसित किया है लेकिन महिलाओं के हाथ में इसका अर्थ विपरीत माना जाएगा.

यदि मस्तिष्क रेखा के अन्त में दो भागों में बँटी हुई शाखा में से नीचे की ओर जाने वाली शाखा अधिक विकसित होती है तब व्यक्ति ने माता के कल्पनात्मक और कलात्मक गुणों को अपनाया होता है. महिलाओं के हाथ में इसका विपरीत अर्थ होगा अर्थात वह पिता के गुणों को अपनाएगी.

यदि बाएँ हाथ में मस्तिष्क रेखा एकदम हल्की अथवा क्षीण हो लेकिन दाएँ हाथ में बलवान और स्पष्ट हो तो समझना चाहिए कि जातक की मानसिक प्रवृत्तियों के विकास में उसके माता-पिता किसी का भी प्रभाव नहीं पड़ा है और व्यक्ति ने स्वयं ही उनको विकसित किया है. ऎसा योग उन व्यक्तियों के हाथों में पाया जाता है जो स्वयं अपने परिश्रम से अपनी उन्नति करते हैं. ऎसे व्यक्ति मानसिक और बौद्धिक रूप से अपने माता-पिता से अधिक बढ़े-चढ़े होते हैं. ऎसे व्यक्तियों में बली इच्छा शक्ति और उच्चाभिलाषा पाई जाती है.

यदि दाहिने हाथ में मस्तिष्क रेखा बाएँ हाथ के मुकाबले क्षीण अथवा कमजोर है तो इसका अर्थ हुआ कि व्यक्ति ने मानसिक विकास के अवसरों का लाभ नहीं उठाया और वह अपने माता-पिता की मानसिक क्षमता की बराबरी न तो करता है और ना ही कभी कर सकता है. ऎसा व्यक्ति स्वभाव से भले हठी क्यूँ ना हो लेकिन उसमें इच्छा शक्ति की कमी होती है. दाहिने हाथ में क्षीण(Weak) मस्तिष्क रेखा का अर्थ यह भी होता है कि व्यक्ति में उच्च अभिलाषा की कमी है. वास्तविकता तो यह है कि जब व्यक्ति का मानसिक विकास होगा ही नहीं तब उच्चाभिलाषा कैसे हो सकती है!!

हथेली में बनी चौड़ी अथवा सतह पर छपी मात्र मस्तिष्क रेखा की बजाय स्पष्ट गहरी रेखा अधिक बली होती है और बलवान मानसिक क्षमता की द्योतक होती है. चौड़ी मस्तिष्क रेखा अस्थिर और परिवर्तनशील स्वभाव की द्योतक होती है. ऎसी रेखा वाले हाथ के व्यक्ति में किसी विषय पर मन केन्द्रित करने की क्षमता नहीं होती है. यह नियम हाथ की सभी रेखाओं पर समान रूप से लागू होता है. चौड़ी मस्तिष्क रेखा प्राय: उन लोगों के हाथों में पाई जाती है जो बौद्धिक काम कम करते हैं और शारीरिक परिश्रम का काम अधिक करते हैं. ऎसे लोग बाहरी काम जैसे खेती-बाड़ी, मशीन आदि के कामों में ज्यादा रहते हैं. उनके बौद्धिक व मानसिक विकास की अपेक्षा शारीरिक पक्ष का विकास अधिक होता है. दिमागी काम करने वालों के हाथ में पतली, स्पष्ट और गहरी मस्तिष्क रेखा होती है. ऎसे व्यक्तियों के हाथ में अन्य रेखाएँ भी इसी प्रकार से होती हैं.

मस्तिष्क रेखा के अध्ययन से यह भी जाना जा सकता है कि जातक किस प्रकार का जीवन व्यतीत कर सकता है. देखने में भले ही कोई व्यक्ति कितना ही बुद्धिमान क्यों ना लगे लेकिन वास्तव में उसमें बौद्धिक विकास कितना हुआ है यह मस्तिष्क रेखा द्वारा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.

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