राशियों के लिए जपनीय मंत्र

भचक्र(Zodiac) में कुल 12 राशियाँ हैं और इन्हीं 12 राशियों में से कोई एक जन्म कुंडली का लग्न(Ascendant) बनती है तो कोई एक राशि जन्म राशि अथवा चन्द्र राशि(Moon Sign) बनती है. कई बार लग्न तथा जन्म राशि एक भी हो सकती है अर्थात लग्न में ही चंद्रमा स्थित होने से लग्न तथा चंद्र राशि एक होगी. लग्न राशि तथा जन्म राशि का जातक के जीवन पर अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है. यदि लग्न अथवा चंद्र राशि जन्म कुंडली में पीड़ित है अथवा गोचरवश पीड़ित हो रही है तब उस राशि से संबंधित मंत्र का जाप करना चाहिए. ऎसा करने पर समस्या से छुटकारा मिलेगा और सुख-शांति बनी रहेगी.

इस लेख में हम पाठकों को हर राशि से संबंधित एक मंत्र बता रहे हैं. पाठकों को यदि अपनी लग्न तथा जन्म राशि पता है तब उसके अनुसार मंत्र का जाप प्रतिदिन नियमित रूप से करना चाहिए.

 

मेष राशि – Aries Sign

मेष राशि भचक्र की पहली राशि है और यह अग्नि तत्व राशियों की श्रेणी में आती है. यह चर राशि(Movable Sign है और इस राशि का स्वामी मंगल ग्रह है जो ऊर्जा से भरपूर माना गया है. इस राशि में सूर्य उच्च(Exalted)  का माना गया है तो शनि इस राशि में नीच(Debilitated) का हो जाता है. यदि मेष राशि आपकी जन्म कुंडली का लग्न बनती है अथवा चंद्र राशि बनती है तब आपको सुबह के समय रोज निम्नलिखित मंत्र की एक माला का जाप करना चाहिए:-

“ऊँ धीं श्रीं श्रीलक्ष्मीनारायाणाय नम:”

 

वृष राशि – Taurus Sign

वृष राशि भचक्र की दूसरी राशि है और यह पृथ्वी तत्व(Earthy Sign) राशि की श्रेणी में आती है. इस राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है और इसे स्थिर राशि(Fixed Sign) माना गया है. इस राशि में चंद्रमा उच्च का होता है और मतान्तर से केतु को इसमें नीच माना गया है और राहु को उच्च(कई स्थानों पर केतु को मिथुन राशि में नीच माना गया है) यदि यह राशि आपका जन्म लग्न बनती है अथवा चंद्र राशि बनती है तब आपको दिए मंत्र का रोज सुबह के समय 108 बार जाप करना चाहिए :-

“ऊँ गोपालाय उत्तरध्वजाय नम:”

 

मिथुन राशि – Gemini Sign

यह भचक्र की तीसरी राशि है और इस राशि का स्वामी ग्रह बुध है. यह राशि वायु तत्व राशि की श्रेणी में आती है और स्वभाव से द्वि-स्वभाव(Dual Nature) मानी गई है. मतान्तर से इस राशि में केतु को नीच का माना गया है और राहु को उच्च. यदि यह राशि आपकी जन्म कुण्डली का लग्न बनती है अथवा चंद्र राशि बनती है और कुंडली में यदि बुध खराब हालत में है  तब आपका आत्मविश्वास कमजोर पड़ सकता है अथवा बुध के अधिकार क्षेत्र में आने वाली समस्याओं से आप घिर सकते है इसलिए नीचे दिए मंत्र का जाप आपको रोज सुबह के समय करना चाहिए :-

“ऊँ क्लीं कृष्णाय नम:”

 

कर्क राशि – Cancer Sign

यह भचक्र की चौथी राशि है और इस राशि का स्वामी चंद्रमा है. यह जल तत्व(Watery Sign) राशि है और इसे चर राशि की श्रेणी में रखा गया है. कर्क राशि का स्वभाव बदलाव का माना गया है अर्थात आपका मूड बहुत जल्दी-जल्दी बदलते रहना क्योंकि यह जल तत्व है तो विचारों में भी स्थिरता नहीं देखी जा सकती. इस राशि में गुरु उच्च के होते हैं तो मंगल इस राशि में नीच के हो जाते हैं. यदि यह राशि आपका लग्न बनती है अथवा चंद्र राशि बनती है तब आपको नियमित रुप से सुबह के समय निम्न मंत्र की एक माला करनी चाहिए :-

“ऊँ हृीं हिरण्यगर्भाय अव्यक्तरूपिणे नम:”

 

सिंह राशि – Leo Sign

यह भचक्र की पाँचवी राशि है और इसे स्थिर राशि माना गया है. यह अग्नि तत्व राशि की श्रेणी में आती है और सूर्य इस राशि का स्वामी है. इस राशि में कोई ग्रह उच्च अथवा नीच का नहीं होता है लेकिन सूर्य अपनी ही राशि में कुछ खास अंशों पर मूल त्रिकोण का हो जाता है. यदि आपकी जन्म कुंडली का लग्न सिंह है अथवा चंद्र राशि सिंह हैं तब आपको निम्न मंत्र के जाप की एक माला सुबह के समय करनी चाहिए :-

“ऊँ क्लीं ब्रह्मणे जगदाधाराय नम:”

 

कन्या राशि – Virgo Sign

कन्या राशि भचक्र की छठी राशि हैं और इसका स्वामी बुध है. इस राशि को स्वभाव से द्वि-स्वभाव माना गया है. यह पृथ्वी तत्व राशि की श्रेणी में आती है. बुध अपनी इस राशि में उच्च का होता है और शुक्र ग्रह इस राशि में नीच के हो जाते हैं. यदि आपकी कुंडली का कन्या लग्न है या आपकी कन्या राशि है तब आपको नीचे दिए मंत्र की एक माला रोज सुबह के समय करनी चाहिए :-

“ऊँ पीं पीताम्बराय नम:”

 

तुला राशि – Libra Sign

तुला राशि भचक्र की सातवीं राशि बनती है और इस राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है. इस राशि को वायु तत्व राशि माना गया है और स्वभाव से इसे चर राशि की श्रेणी में रखा गया है. इस राशि में जहाँ शनि देव उच्चता पाते हैं तो वहीं सूर्य देव नीच के हो जाते हैं.

यदि आपकी जन्म कुंडली का लग्न तुला है अथवा चंद्र राशि तुला है तब आपको निम्नलिखित मंत्र की एक माला रोज सुबह के समय करनी चाहिए :-

“ऊँ तत्त्वनिरंजनाय तारक रामाय नम:”

 

वृश्चिक राशि – Scorpio Sign

यह भचक्र की आठवीं राशि मानी गई है और इसका स्वामी ग्रह मंगल है. इस राशि को जल तत्व माना गया है और इसे स्थिर राशि की श्रेणी में रखा गया है. इस राशि में चंद्रमा नीच का हो जाता है( मतान्तर से केतु को इस राशि में उच्च का माना गया है और राहु को नीच).

यदि आपका जन्म लग्न वृश्चिक है अथवा आपकी चंद्र राशि वृश्चिक है तब आपको रोज सुबह नीचे दिए मंत्र का जाप करना चाहिए :-

“ऊँ नारायणाय सूरसिंहाय नम:”

 

धनु राशि – Sagittarius Sign

यह भचक्र की नवीं राशि हैं और इस राशि का स्वामी ग्रह गुरु माना गया है. इस राशि को अग्नि तत्व माना गया है और स्वभाव से इसे द्वि-स्वभाव राशि की श्रेणी में रखा गया है. मतान्तर से इस राशि में केतु उच्च का होता है तो राहु नीचता पाता है.

यदि आपकी जन्म कुंडली का लग्न धनु बनता है अथवा आपकी चंद्र राशि धनु बनती है तब आपको निम्नलिखित मंत्र की एक माला रोज सुबह के समय करनी चाहिए :-

“ऊँ श्रीं देवकृष्णाय ऊर्ध्वजाय नम:”

 

मकर राशि – Capricorn Sign

यह भचक्र की दसवीं राशि है और इसका स्वामी ग्रह शनि है. स्वभाव से यह चर राशि है और इसे पृथ्वी तत्व माना गया है. इस राशि में गुरु नीच के होते हैं तो मंगल इसमें उच्चता पाते हैं. यदि आपका जन्म लग्न मकर है अथवा आपकी जन्म राशि मकर है तब आपको दिए मंत्र का जाप रोज सुबह के समय करना चाहिए :-

“ऊँ श्रीं वत्सलाय नम:”

 

कुंभ राशि – Aquarius Sign

कुंभ राशि भचक्र की ग्यारहवीं राशि है और इसका स्वामी ग्रह शनि है. इस राशि को स्थिर राशि माना गया है और इसे वायु तत्व राशि की श्रेणी में रखा गया है. इस राशि में कोई भी ग्रह उच्च अथवा नीच का नहीं होता है. यदि आपका लग्न कुंभ है अथवा आपकी चंद्र राशि कुंभ है तब आपको रोज नियम से सुबह के समय निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए :-

“ऊँ श्रीं उपेन्द्राय अच्युताय नम:”

 

मीन राशि – Pisces Sign

यह भचक्र की अंतिम राशि है और इस राशि का स्वामी ग्रह गुरु है. इस राशि को जल तत्व माना गया है और स्वभाव से इसे द्वि-स्वभाव राशि की श्रेणी में रखा गया है. इस राशि में शुक्र ग्रह उच्च के होते हैं और बुध ग्रह यहाँ नीच के हो जाते हैं. यदि आपका लग्न मीन है अथवा जन्म राशि मीन है तब आपको निम्न मंत्र की एक माला रोज सुबह के समय करनी चाहिए :-

“ऊँ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नम:”

 

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