अंग फड़कने का अर्थ (अंग स्फुरण)

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अंग

हिन्दुस्तान में बहुत सी बातें ऎसी है जिनके विषय में यह नहीं पता कि यह कब और कैसे आरंभ हुई पर इन बातों का आम व्यक्ति के जीवन पर काफी प्रभाव माना जाता है. आपको इस लेख के माध्यम से अंगों के फड़कने का फल बताया जाएगा. प्राचीन ग्रंथों में स्त्रियों के बाएँ अंग और पुरुषों के दाएँ का फड़कना शुभ माना गया है. नीचे दिए गए फलों की शुभ तथा अशुभ प्राप्ति स्त्री तथा पुरुषों में भिन्न होगी.

 

  • यदि किसी के मस्तक में स्फुरण हो रहा है तब व्यक्ति को भूमि लाभ होने की संभावना बनती है.
  • यदि किसी व्यक्ति के ललाट में स्फुरण हो रहा हो तब स्थान लाभ की प्राप्ति हो सकती है. स्थान का तात्पर्य प्रमोशन आदि भी हो सकता है.
  • यदि किसी व्यक्ति के भौहों के मध्य स्फुरण हो रहा है तब उसे किसी ना किसी रुप में सुख की प्राप्ति होती है.
  • यदि सारा माथा ही एक साथ फड़क रहा है तब दूर स्थान की यात्रा का संकेत होता है और साथ ही रास्ते में परेशानियाँ आने का भी इशारा इसे समझना चाहिए.
  • यदि नाक का पहला भाग अर्थात नाक की नोंक फड़क रही है तब यह किसी संकट का संदेश हो सकता है अथवा निकट भविष्य में कोई बीमारी भी हो सकती है.
  • यदि नेत्र फड़कते हैं तब धन की प्राप्ति होती है.
  • गाल फड़कने पर शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
  • यदि गाल फड़क रहा है तब निकट भविष्य़ में किसी से दोस्ती भी हो सकती है.
  • हाथ फड़कने पर धन लाभ हो सकता है.
  • दायाँ कंधा फड़कने से धन लाभ हो सकता है.
  • बायाँ कंधा फड़क रहा है तब किसी काम की सफलता का इशारा हो सकता है.
  • यदि दोनो कंधे ही एक साथ फड़क रहे हैं तब किसी से लड़ाई झगड़ा हो सकता है.
  • छाती में स्फुरण होने पर विजय प्राप्त होती है.
  • कमर में स्फुरण होने पर आमोद प्रमोद मिल सकता है.
  • पीठ में स्फुरण का अर्थ है कि बहुत बड़ी समस्या सामने आ सकती है.
  • ह्रदय स्थान पर स्फुरण होने पर इष्ट प्राप्ति होती है.
  • पेट में स्फुरण होने पर कोष की प्राप्ति हो सकती है.
  • आंतों में स्फुरण होने पर कोष वृद्धि होती है.
  • पैरों के ऊपरी भाग में स्फुरण होने पर स्थान लाभ हो सकता है.
  • दाएं पैर के तालु में स्फुरण हो रहा है तब सामाजिक प्रतिष्ठा में हानि की संभावना बनती है.
  • बाएँ तालु का फड़कना भविष्य में होने वाली यात्रा का संकेत हो सकता है.
  • नाभि में स्फुरण होने पर जीवनसाथी को कष्ट हो सकता है.

 

उपरोक्त फलों का शुभ फल स्त्री के बाएं अंग और पुरुष के दाएं अंग के विपरीत होता है तो विपरीत फलों की प्राप्ति होती है. उपरोक्त फलों के अतिरिक्त यदि उपरोक्त अंगों में किसी व्यक्ति के तिल का चिन्ह है, मस्सा है, लहसुन है अथवा उसे इन अंगों में खुजली हो तब भी ऊपर दिए फलों का अर्थ ही मानना चाहिए.

 

यदि कभी पैरों के तालु में खुजली हो तब व्यक्ति यात्रा पर जा सकता है. बड़े उच्चाधिकारियों अथवा मंत्री के हाथ में तिल या खुजली हो तब उन्हें जीत प्राप्त होती है. यदि यही तिल या खुजली साधारण मनुष्य के हाथ में हो तब उन्हें भी लाभ की प्राप्ति अवश्य होती है.  

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