मंगल ग्रह

मंगल ग्रह युवा है, गठा हुआ शरीर है, क्षत्रिय जाति है. मंगल को सेनापति का दर्जा मिला हुआ है. एक सैनिक के सभी गुण इसमें मौजूद हैं. यह् पराक्रमी तथा साहस से भरा हुआ है. यह ग्रह भूमि का कारक भी है. अग्नि, चोर, रोग इन का भय रहता है. यह छोटे भाई-बहन का मुख्य…

मंगल स्तोत्र

रक्ताम्बरो रक्तवपु: किरीटी, चतुर्मुखो मेघगदो गदाधृक । धरासुत: शक्तिधरश्च शूली, सदा मम स्याद वरद: प्रशान्त: ।।1।। धरणीगर्भसंभूतं विद्युतेजसमप्रभम । कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम ।।2।। ऋणहर्त्रे नमस्तुभ्यं दु:खदारिद्रनाशिने । नमामि द्योतमानाय सर्वकल्याणकारिणे ।।3।। देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसपन्नगा: । सुखं यान्ति यतस्तस्मै नमो धरणि सूनवे ।।4।। यो वक्रगतिमापन्नो नृणां विघ्नं प्रयच्छति । पूजित: सुखसौभाग्यं तस्मै क्ष्मासूनवे नम: ।।5।। प्रसादं…

मंगल के लिए मंत्र

ज्योतिष में सभी नौ ग्रह का अपना विशिष्ट महत्व होता है. सभी ग्रह अपनी दशा/अन्तर्दशा में अपने फल प्रदान करने की क्षमता रखते हैं.  यदि ग्रह शुभ होकर पीड़ित है तब उन्हें कई प्रकार से बली बनाया जा सकता है और यदि ग्रह कुंडली में अशुभ भाव का स्वामी है तब भी उसका उपचार किया…