महाभागवत – देवी पुराण – अड़तालीसवाँ अध्याय 

श्रीमहादेवजी बोले – तदनंतर श्रीरामचंद्र जी दंडवत प्रणाम करके परम भक्ति से युक्त होकर प्रसन्नमन से भगवती की स्तुति करने

Continue reading

error: Content is protected !!