कार्तिक माह माहात्म्य – ग्यारहवाँ अध्याय

जिसको जप कर जीव, हो भवसागर से पार। ग्यारहवें अध्याय का, ‘कमल’ करे विस्तार।। एक बार सागर पुत्र जलन्धर अपनी

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