कार्तिक माह माहात्म्य – चौथा अध्याय

माता शारदा की कृपा, लिखूं भाव अनमोल। कार्तिक माहात्म का कहूं, चौथा अध्याय खोल।। नारदजी ने कहा – ऎसा कहकर

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कार्तिक माह माहात्म्य – तीसरा अध्याय

श्रीकृष्ण भगवान के चरणों में शीश झुकाओ। श्रद्धा भाव से पूजो हरि, मनवांछित फल पाओ।। सत्यभामा ने कहा – हे

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कार्तिक माह माहात्म्य – दूसरा अध्याय

सिमर चरण गुरुदेव के, लिखूं शब्द अनूप। कृपा करें भगवान, सतचितआनन्द स्वरूप।। भगवान श्रीकृष्ण आगे बोले – हे प्रिये! जब

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कार्तिक माह माहात्म्य – पहला अध्याय

मैं सिमरूँ माता शारदा, बैठे जिह्वा आये। कार्तिक मास की कथा, लिखे ‘कमल’ हर्षाये।। नैमिषारण्य तीर्थ में श्रीसूतजी ने अठ्ठासी

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