बुधवार की आरती
आरती युगलकिशोर की कीजै। तन मन धन न्यौछावर कीजै॥ गौरश्याम मुख निरखन लीजै। हरि का रूप नयन भर पीजै॥ रवि
Astrology, Mantra and Dharma
आरती युगलकिशोर की कीजै। तन मन धन न्यौछावर कीजै॥ गौरश्याम मुख निरखन लीजै। हरि का रूप नयन भर पीजै॥ रवि
जय शिव ओंकारा, हर जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।। जय शिव…. एकानन चतुरानन पंचानन राजे
आरती करत जनक कर जोरे, बड़े भाग्य रामजी घर आए मोरे.. जीत स्वयंवर धनुष चढ़ाए, सब भूपन के गर्व मिटाए..
कहं लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे, सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की……… गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला. श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।। जय…….. एक दंत दयावंत, चार भुजा