राहु ग्रह
राहु की कोई जाति नहीं है. सेना में सैनिकों का दर्जा दिया गया है. यह धूम्र वर्ण के हैं, इनकी
Astrology, Mantra and Dharma
राहु की कोई जाति नहीं है. सेना में सैनिकों का दर्जा दिया गया है. यह धूम्र वर्ण के हैं, इनकी
दो तरह के विचार मांगलिक योग को लेकर हैं : उत्तर भारतीय लोगों के अनुसार पहले, चौथे, सातवें, आठवें
प्राचीन समय से ही विद्वानों का मत रहा है कि इस सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है.
राहु/केतु एक ही राक्षस था जिसका नाम स्वरभानु था. समुद्र मंथन के समय देवताओं को राक्षसों की सहायता लेनी पड़ी
ज्योतिष, वेदों के छ: अंग में से एक अंग है. वेदों के छ: अंग निम्नलिखित हैं :- शिक्षा कल्प –
प्रथम भाव – First House तनु भाव प्रथम भाव से व्यक्ति की शारीरिक संरचना का विचार किया जाता है. पूरे