देवीस्तुति:
अथ तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् – देवीस्तुति: देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके
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अथ तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम् – देवीस्तुति: देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके
“भविष्य पुराण” में शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र का उल्लेख किया गया है. जो भी व्यक्ति अथवा साधक इस स्तोत्र का नियमित
ऊँ नमश्चण्डिकायै नम: अथ श्री दुर्गा सप्तशती भाषा पहला अध्याय – Chapter First – Durga Saptashati (महर्षि ऋषि का राजा
संवत 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में वात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई. फोड़े-फुंसियों
अंगं हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम् अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।। मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला
मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंकसकं विलासिलोकरंजकम् अनायकैकनायकं नमामि तं विनायम् नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायम् नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम्