बिल्वाष्टकम्

बिल्वाष्टकम् में बेल पत्र (बिल्व पत्र) के गुणों के साथ-साथ भगवान शंकर का उसके प्रति प्रेम भी बताया गया है.

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श्रीयमुनाष्टकम्

मुरारिकायकालिमा ललामवारिधारिणी तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी। मनोSनुकूलकूल कुंजपुंजधूतदुर्मदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा।।1।।   मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता भृशं प्रपातकप्रवंचनातिपण्डितानिशम्। सुनन्दनन्दनांगसंगरागरंजिता हिता। धुनोतु0।।2।।   लसत्तरंगसंगधूत

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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली

वन्दे पद्ममकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां, हस्ताभ्या-अभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम्। भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहर-ब्रह्मादिभि: सेवितां, पाश्वे पंकज-शंख-पद्म-निधिभिर्युक्तां सदा शक्तिभि:।।            

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विष्णु शतनाम स्तोत्रम्

नारद उवाच ऊँ वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्। जनार्दनं  हरिं  कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम्।।   वाराहं  पुण्डरीकाक्षं  नृसिंहं नरकान्तकम्। अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम्।।

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