श्रीरामाष्टकम्

कृतार्तदेववन्दनं दिनेशवंशनन्दनम्। सुशोभिभालचन्दनं     नमामि   राममीश्वरम्।।1।।   मुनीन्द्रयज्ञकारकं        शिलाविपत्तिहारकम्। महाधनुर्विदारकं      नमामि   राममीश्वरम्।।2।।   स्वतातवाक्यकारिणं   तपोवने     विहारिणम्। करे    सुचापधारिणं    नमामि   राममीश्वरम्।।3।।  

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वेदसारशिवस्तव:

पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य    कृत्तिं    वसानं    वरेण्यम्। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गांगवारिं महादेवमेकं स्मरामि     स्मरारिम्।।1।।   महेशं सुरेशं सुरारार्तिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यंगभूषम्।

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श्रीयमुनाष्टकम्

मुरारिकायकालिमा ललामवारिधारिणी तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी। मनोSनुकूलकूल कुंजपुंजधूतदुर्मदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा।।1।।   मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता भृशं प्रपातकप्रवंचनातिपण्डितानिशम्। सुनन्दनन्दनांगसंगरागरंजिता हिता। धुनोतु0।।2।।   लसत्तरंगसंगधूत

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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली

वन्दे पद्ममकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां, हस्ताभ्या-अभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम्। भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहर-ब्रह्मादिभि: सेवितां, पाश्वे पंकज-शंख-पद्म-निधिभिर्युक्तां सदा शक्तिभि:।।            

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