शिवरक्षास्तोत्रम्
विनियोग: – ऊँ अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषि:, श्रीसदाशिवो देवता, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे विनियोग: । अर्थ – विनियोग – इस
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विनियोग: – ऊँ अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषि:, श्रीसदाशिवो देवता, अनुष्टुप् छन्द:, श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे विनियोग: । अर्थ – विनियोग – इस
महिम्न: पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिर: । अथावाच्य: सर्व: स्वमतिपरिणामावधि गृणन् ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवाद: परिकर: ।।1।।
श्रीगणेशाय नम: रुद्राष्टाध्यायी में कुल आठ पाठ हैं जिसमें पाँचवाँ पाठ मुख्य है. यदि किसी व्यक्ति के पास समय का
यदि कन्या विवाह में देरी हो रही है या कन्या के योग्य कोई अच्छा वर नहीं मिल रहा हो तब
खण्डग्रास चन्द्रग्रहण आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मंगलवार को 16/17 जुलाई की मध्यरात्रि में समस्त भारत में खण्डग्रास के रुप
इन्द्र उवाच नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते ।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित