श्री शिवाष्टक स्तोत्रम
प्रभुमीशमनीशमशेष गुणं गुणहीनमहीश गरलाभरणम । रण निर्जित दुर्जय दैत्यपुरं, प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम ।।1।। गिरिराजसुतान्वित-वामतनुं तनुनिन्दितराजित कोटिविधुम । विधिविष्णुशिरोधृत-पादयुगं, प्रणमामि शिवं
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प्रभुमीशमनीशमशेष गुणं गुणहीनमहीश गरलाभरणम । रण निर्जित दुर्जय दैत्यपुरं, प्रणमामि शिवं शिवकल्पतरुम ।।1।। गिरिराजसुतान्वित-वामतनुं तनुनिन्दितराजित कोटिविधुम । विधिविष्णुशिरोधृत-पादयुगं, प्रणमामि शिवं
प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम । विहितवहित्रचरित्रमखेदम । केशव धृतमीनशरीर जय जगदीश हरे ।।1।। क्षितिरतिविपुलतरे तव तिष्ठति पृष्ठे । धरणिधरणकिणचक्रगरिष्ठे । केशव
ऊँ अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषि: श्रीसीता रामचन्द्रो देवता अनुष्टुप् छन्द: सीता शक्ति: श्रीमान् हनुमान् कीलकं श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोग: । अथ
दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करै सनमान । तेहि कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान ।। चौपाई जय हनुमंत
गजेन्द्र मोक्ष का महत्व गजेन्द्र मोक्ष की पौराणिक कथा महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित भगवत पुराण के तीसरे अध्याय में
ऊँ आद्य लक्ष्म्यै नम : ऊँ विद्यालक्ष्म्यै नम : ऊँ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम : ऊँ अमृतलक्ष्म्यै नम : ऊँ काम