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परमहंस गायत्री मंत्र – Paramahansa Gayatri Mantra ऊँ परमहंसाय विद्महे महातत्त्वाय धीमहि तन्नो हंस: प्रचोदयात्। ब्रह्मा गायत्री मंत्र –
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परमहंस गायत्री मंत्र – Paramahansa Gayatri Mantra ऊँ परमहंसाय विद्महे महातत्त्वाय धीमहि तन्नो हंस: प्रचोदयात्। ब्रह्मा गायत्री मंत्र –
कृतार्तदेववन्दनं दिनेशवंशनन्दनम्। सुशोभिभालचन्दनं नमामि राममीश्वरम्।।1।। मुनीन्द्रयज्ञकारकं शिलाविपत्तिहारकम्। महाधनुर्विदारकं नमामि राममीश्वरम्।।2।। स्वतातवाक्यकारिणं तपोवने विहारिणम्। करे सुचापधारिणं नमामि राममीश्वरम्।।3।।
पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम्। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गांगवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम्।।1।। महेशं सुरेशं सुरारार्तिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यंगभूषम्।
बिल्वाष्टकम् में बेल पत्र (बिल्व पत्र) के गुणों के साथ-साथ भगवान शंकर का उसके प्रति प्रेम भी बताया गया है.
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता, न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता। न जाया न विद्या न
मुरारिकायकालिमा ललामवारिधारिणी तृणीकृतत्रिविष्टपा त्रिलोकशोकहारिणी। मनोSनुकूलकूल कुंजपुंजधूतदुर्मदा धुनोतु मे मनोमलं कलिन्दनन्दिनी सदा।।1।। मलापहारिवारिपूरभूरिमण्डितामृता भृशं प्रपातकप्रवंचनातिपण्डितानिशम्। सुनन्दनन्दनांगसंगरागरंजिता हिता। धुनोतु0।।2।। लसत्तरंगसंगधूत