वैशाख माहात्म्य – स्कन्द पुराण
वैशाख मास की श्रेष्ठता नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ।। अर्थ – भगवान नारायण,
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वैशाख मास की श्रेष्ठता नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ।। अर्थ – भगवान नारायण,
नरक तथा स्वर्ग में जाने वाले कर्मों का वर्णन ऋषियों ने कहा – सूतजी ! इस विषय को पुन: विस्तार
अम्बरीष ने पूछा – मुने ! वैशाख माह के व्रत का क्या विधान है? इसमें किस तपस्या का अनुष्ठान करना
अम्बरीष ने कहा – मुने ! जिसके चिन्तन मात्र से पाप राशि का लय हो जाता है, उस पाप प्रशमन
सूतजी कहते हैं – महात्मा नारद के वचन सुनकर राजर्षि अम्बरीष ने विस्मित होकर कहा – “महामुने ! आप मार्गशीर्ष
भगवद्भक्ति के लक्षण तथा वैशाख स्नान की महिमा अम्बरीष बोले – मुनिश्रेष्ठ ! आपने बड़ी अच्छी बात बतायी, इसके लिए