श्रीललितात्रिशतीस्तोत्ररत्नप्रारम्भ:

सकुंकुमविलेपनामलिकचुम्बिकस्तूरिकां  समन्दहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् । अशेषजनमोहिनीमरुणमाल्यभूषाम्बरां  जपाकुसुमभासुरां जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ।।   अगस्त्य उवाच  हयग्रीव दयासिन्धो भगवन् भक्तवत्सल । त्वत्त: श्रुतमशेषेण श्रोतव्यं

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अथ मूर्त्तिरहस्यम्

देवी की अंगभूता छ्: देवियाँ हैं – नन्दा, रक्तदन्तिका, शाकम्भरी, दुर्गा, भीमा और भ्रामरी. ये देवियों की साक्षात मूर्तियाँ हैं,

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