शिव 108 नामावली
1) ऊँ श्री सर्वभूतहराय नम: 2) ऊँ श्री शास्वताय नम: 3) ऊँ श्री शमशानवासिने नम: 4) ऊँ श्री तपस्वने नम:
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1) ऊँ श्री सर्वभूतहराय नम: 2) ऊँ श्री शास्वताय नम: 3) ऊँ श्री शमशानवासिने नम: 4) ऊँ श्री तपस्वने नम:
1) ऊँ श्री विष्णवे नम: 2) ऊँ श्री परमात्मने नम: 3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम: 4) ऊँ श्री क्षेत्र
1) ऊँ श्री गणेश्वराय नम: 2) ऊँ श्री गणाध्यक्षाय नम: 3) ऊँ श्री गणप्रियाय नम: 4) ऊँ श्री गणनाथाय नम:
भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिनं वदनै: प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथन: पंचभिरपि। न षड्भि: सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपति- स्तदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसर:।।1।। घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि पदै- र्विशिष्यानाख्येयो
अविनयमपनय विष्णो दमय मन: शमय विषयमृगतृष्णाम्। भूतदयां विस्तारय तारय संसारसागरत:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए, मेरे
ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं