सन्तानगणपतिस्तोत्रमम्
नमोSस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च । सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च ।।1।। अर्थ – सिद्धि-बुद्धि सहित उन गणनाथ को नमस्कार है, जो
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नमोSस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च । सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च ।।1।। अर्थ – सिद्धि-बुद्धि सहित उन गणनाथ को नमस्कार है, जो
जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु कर्क राशि में स्थित है या केतु व मंगल की युति कर्क राशि में
मृत्यु के अनन्तर के कृत्य, शव आदि नाम वाले छ्: पिण्ड दानों का फल, दाह संस्कार की विधि, पंचक में
मरणासन्न व्यक्तियों के निमित्त किये जाने वाले कृत्य गरुड़ उवाच गरुड़जी बोले – हे प्रभो! आपने आतुरकालिक दान के संदर्भ
गरुड. उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे तार्क्ष्य ! मनुष्यों के हित की दृष्टि से आपने बड़ी उत्तम बात
इस अध्याय में पुत्र की महिमा, दूसरे के द्वारा दिये गये पिण्डदान आदि से प्रेतत्व से मुक्ति की बात कही