भीष्म पंचक व्रत
भीष्म पंचक व्रत विधि भीष्म पंचक व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है. इस व्रत
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भीष्म पंचक व्रत विधि भीष्म पंचक व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है. इस व्रत
द्वापर युग का आरम्भ कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था. यदि कोई भी व्यक्ति नवमी से
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुण्ठ चतुर्दशी भी कहा जाता है. इस दिन आंवले का पूजन किया
ब्रह्मा जी कहते हैं – “जो भक्त कार्तिक महीने में ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर पवित्र हो तुलसी दल से
कार्तिक महीने में आकाशदीप का भी महत्व माना गया है. जो व्यक्ति कार्तिक मास आने पर प्रात:काल स्नान करके आकाशदीप
कार्तिक मास में जो भी व्रत आदि रखता है उसे सदा एक पहर रात बचते ही उठ जाना चाहिए फिर