
बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अध्याय 85 में महर्षि पराशर जी ने शरीर में स्थित तिलादि का फलकथन कहा है। आइये जानें :-
पराशर बोले – श्लोक 1
अब मैं नर-नारियों के शरीर पर पाए जाने वाले तिल, मस्से व आवर्त (भौंरों) का फल विशेषतया कहता हूँ।
तिल विचार – श्लोक 2, 3
स्त्रियों के बाएं भाग में और पुरुषों के दाएं भाग में चिन्ह होना, लाल या काला तिल, निशान, बालों से बना चक्र (भँवर) उत्तम होता है।
स्त्रियों के वाम स्तन पर तिलादि चिन्ह सौभाग्य का सूचक है। जिस स्त्री के दाएं स्तन पर लाल या काला तिल, मस्सा हो तो वह अधिक भाग्यशाली संतानों की जननी होती है।
श्लोक 4, 5 का अर्थ
बाएं स्तन पर लाल रंगत वाला या भूरा तिल हो तो उसे एक ही पुत्र पैदा होता है। यदि वैसा ही चिन्ह दाएं स्तन पर भी हो तो कई पुत्र-पुत्रियां होती हैं।
ललाटस्थ तिल का विचार – श्लोक 6
दोनों भौहों के बीच या ललाट पर तिलादि लक्ष्य हो तो राजयोग कारक होता है। गाल पर लाल रंग का तिल या मस्सा सदैव उत्तम भोजन दिलाता है। गाल पर काला मस्सा भोजन की कमी को बताता है (यह कुछ अन्यथा प्रतीत होता है)
गुप्तांगगत चिन्ह – श्लोक 7,8,9,10,11
स्त्री के गुप्त प्रदेश में दायीं ओर चिन्ह (तिलादि) होना राजा की पत्नी या राजा की माता होना सूचित करता है।
नाक की नोंक पर लाल तिलादि हो तो व राजपत्नी होती है। इसके विपरीत काला चिन्ह पुंश्चली या विधवा का होता है।
नाभि के नीचे स्त्री-पुरुषों को चिन्ह होना शुभ है। कान, गाल, हाथ, गले में तिल हो तो पहली संतान पुत्र होती है। साथ ही ऐसी स्त्री सुखी व सौभाग्यशाली होती है।
टखने के प्रदेश में तिलादि चिन्ह किसी भी रंग का हो, वह दुःखदायी होता है।
मस्तक पर त्रिशूल के समान चिन्ह हो तो स्त्री रानी व पुरुष राजा होता है।
रोमावर्त (भँवरी) का फल – श्लोक 12,13,14,15
बाएं से दायीं ओर घूमती बालों या रोमों की भँवरी सदैव शुभ होती है। वामावर्त अशुभ होती है। ह्रदय, नाभि, हाथ, कान, कमर का दायां भाग, बस्ति में विशेष शुभ होता है।
कटि प्रदेश (तगड़ी का स्थान), गुप्तांग, पेट, कमर के बीच में भँवर दुर्भाग्य की सूचक होती है।
पेट पर भँवर हो तो पति का नाश, कमर के बीच में हो तो चरित्रहीन, गले में, ललाट पर या माँग भरने के स्थान पर, माथे के बीच में आवर्त पुरुष व स्त्री किसी को भी शुभ नहीं होता है।
शुभ लक्षण व चेष्टा वाली स्त्री, भाग्य व आयु से निर्बल पति को भी सौभाग्यशाली व दीर्घायु सुखी बना देती है।
