
बृहत् पराशर होरा शास्त्र के 81वें अध्याय में नक्षत्रों के आधार पर महर्षि पराशर जी ने जातकों का चरित्र चित्रण किया है कि किस प्रकार के गुण रहेगें। हर नक्षत्र का फल कहा गया है।
अश्विनी – इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति विज्ञानी, निरोग, वैद्य, दाता, धनी, सेवक व स्त्री से युक्त, चतुर राजसेवक, शूर होता है।
भरणी – इस नक्षत्र में उत्पन्न व्यक्ति धीर, क्रूर, झूठ बोलने वाला, दूसरों के धन का लोभ, चंचल बुद्धि, अनेक शत्रुओं वाला, अनेक पुत्रों व भृत्यों वाला, मांस व मदिरा का प्रेमी होता है।
कृतिका – इस नक्षत्र के जातक की बुद्धि धार्मिक होती है। धनवान होता है, स्वाध्यायशील, कुलीन रूपयुक्त, अकृपण होता है।
रोहिणी – इस नक्षत्र का व्यक्ति पुत्र, धन, पशु संपत्ति से युक्त, विद्वान्, दानी, धैर्यशाली, कम बोलने वाला, स्थिर बुद्धि, वृषभ की तरह दबंग चलने वाला, तेजस्वी होता है।
मृगशिरा – इस नक्षत्र का व्यक्ति शीलवान, रूपवान, सौम्य विचार, परिश्रमी, वेदज्ञ, चंचल बुद्धि, विनीत होता है।
आर्द्रा – इस नक्षत्र का व्यक्ति क्रोधी, क्रूर, दबंग, परद्रव्य व परस्त्री की ओर आकृष्ट होने वाला, कठोर भाषी, बहुत धैर्य वाला होता है।
पुनर्वसु – इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक का यश घटता-बढ़ता रहता है। वह रोगग्रस्त, कई पुत्रों वाला होता है।
पुष्य – इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक कान्तिमान, सत्त्वगुण युक्त, बहुत अध्ययनशील, स्त्री, सेवक व धन से युक्त, बड़े परिवार वाला अथवा बड़े कार्य करने वाला, वक्ता होता है।
अश्लेषा – इस नक्षत्र का व्यक्ति धीरे चलने वाला होता है अथवा क्रियाहीन कह सकते हैं। चपटी आँखों वाला, क्रूर, क्रोधी, सदा जलता-भुनता सा रहने वाला, दानी, मर्दन करने वाला, भोगी तथा अनेक आदतों (शौक) वाला होता है।
मघा – इस नक्षत्र का व्यक्ति माता-पिता का भक्त, माता से क्रोध के वशीभूत रहने वाला, पिता के साथ कार्य करने वाला अथवा पिता के कामों को आगे बढ़ाने वाला होता है। अनेक मनुष्यों व पशुओं से मित्रता रखने वाला, अनेक मित्रों व शत्रुओं वाला होता है।
पूर्वाफाल्गुनी – इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक बहुत भाग्यशाली, कम संतति वाला, सौभाग्यशील, आकर्षक व्यक्तित्व, कम धन वाला, बहुत तीव्र बुद्धि से रहित, दूसरों के भाग्य से उन्नति करने वाला होता है।
उत्तराफाल्गुनी – इस नक्षत्र का व्यक्ति हाथी-घोड़ो पर सवारी करने वाला, दानी, भोगी, घूमने का शौक़ीन, कोमलभाषी, गीत-संगीत व आमोद-प्रमोद से प्रेम करने वाला, विद्वान् होता है।
हस्त – इस नक्षत्र में उत्पन्न व्यक्ति भारी या बड़े हाथ पैरों वाला व अनेक प्रकार के धन-धान्य रखने वाला, ईर्ष्याभावयुक्त, धर्म-अर्थ-काम का भोग करने वाला, पुत्रयुक्त होता है।
चित्रा – इस नक्षत्र का व्यक्ति वेदों के अर्थों को जानने वाला, शास्त्रों का जानकर, पशुधन से युक्त, तकनीकी कार्य करने वाला, अनोखी आँखों वाला, सौभाग्यशील, तीन पुत्रों वाला होता है।
स्वाति – इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अनेक लोगों का पालक, वक्ता, धर्मार्थ काम पाने वाला, प्रिय, उत्साही, लोकविरुद्ध या लीक से हटकर काम करने वाला, कम शत्रुओं वाला, कुल में अग्रगण्य होता है।
विशाखा – इस नक्षत्र का व्यक्ति श्रीमान, यज्ञादि करने वाला, विद्वान्, धनी, विरोधियों से भी मृदु व्यवहार करने वाला, तीखा, अभिमानी, प्रसिद्द होता है।
अनुराधा – इस नक्षत्र का व्यक्ति पक्की दोस्ती वाला, तेजस्वी, पुत्रयुक्त, बहुत सुखी, अपने वर्ग में अग्रगण्य, धन का लोभी होता है।
ज्येष्ठा – इस नक्षत्र का व्यक्ति अपने वर्ग में, गुणों द्वारा राजा द्वारा भी सम्मान पाता है तथा शत्रुनाशक, तेजस्वी, धनी होता है।
मूल – इस नक्षत्र का व्यक्ति धनधान्यपति, दानी, दूसरों का पैसा पाने वाला, कलहशील, क्रूर, शत्रुसंतापकर्ता, मूल (वृक्ष, चर्म आदि) से जीविका चलाने वाला होता है।
पूर्वाषाढ़ा – इस नक्षत्र का व्यक्ति जलमार्ग से जीविका करने वाला, क्लेश सहने वाला, परस्त्री का इच्छुक, नाजुक शरीर, शराब का शौक़ीन होता है।
उत्तराषाढ़ा – इस नक्षत्र का व्यक्ति भ्रमणशील, उद्यान व वन आदि में भ्रमण का शौक़ीन, प्रवासी, देवता व तीर्थ व साधुओं का सेवक, अनेक कलाओं से युक्त, प्रियभाषी होता है।
श्रवण – इस नक्षत्र का व्यक्ति अपनी जाति या वर्ग में श्रेष्ठ होता है, धनी, दान की भावना रखने वाला, उदार, कुशल, निरोग, शत्रुहीन होता है।
धनिष्ठा – इस नक्षत्र का व्यक्ति धनधान्य की बहुतायत वाला, राजा द्वारा सम्मानित, यक्षकर्ता, सुखी, शत्रुहीन, संगीतादि का प्रेमी होता है।
शतभिषा – इस नक्षत्र का व्यक्ति परस्त्री तथा मद्य का सेवन करने वाला, क्लेशसहिष्णु, धीर, बचत करने में कुशल, पक्के मित्रों वाला, वैद्य, लेकिन स्वयं रोगी होता है।
पूर्वाभाद्रपद – इस नक्षत्र का व्यक्ति भयंकर काम करने वाला, क्रोधी, रात में विशेष प्रभावशाली, तीखे स्वभाव वाला, पराक्रमी, चंचल, खुरदरे स्वभाव वाला, डटकर मुकाबला करने वाला होता है।
उत्तराभाद्रपद – इस नक्षत्र का व्यक्ति राजा से सम्मानित, अनेक पुत्रों वाला, दानवृत्ति वाला, पानी से डरने वाला, यज्ञादि व अध्ययन में रूचि युक्त होता है।
रेवती – इस नक्षत्र का उत्पन्न व्यक्ति सब सम्पत्तियों का भोग करने वाला, दानशील, भ्रमणशील, प्रसिद्द या शुद्ध वंश में उत्पन्न, पशुधन युक्त, कम पुत्रों वाला होता है।
