आर्द्रा नक्षत्र का उपचार

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अगर जन्म कुंडली में आर्द्रा जन्म नक्षत्र है और वह पीड़ित अथवा अशुभ है तब भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए. वैसे भी आर्दा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है और राहु सर्प का मुख है. वह सर्प जो सदा भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाता है इसलिए इस नक्षत्र की पीड़ा दूर करने का सबसे अच्छा उपाय भगवान शंकर की पूजा-अर्चना ही है. भगवान शंकर की पूजा करते हुए रोज एक माला “ऊँ नम: शिवाय” की करनी चाहिए जिससे इस नक्षत्र के दोष खतम हो जाते हैं.

अगर आर्द्रा नक्षत्र पीड़ित नहीं है तब भी भगवान शंकर की पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए. भगवान शंकर का मंत्र, जाप, स्तोत्र अथवा सहस्त्रनाम आदि का पाठ करने से इस नक्षत्र के अशुभ दोष समाप्त होते हैं. माना आप कभी कोई काम करना चाहते हैं और चंद्र का गोचर आर्द्रा नक्षत्र से हो रहा है तब आप भोलेनाथ का नाम जपते हुए, उन्हें स्मरण करते हुए कार्य का प्रारंभ करेगें तब अवश्य ही आपका काम बनेगा. कार्य सफल होता है, उन्नति होती है और सुख्-समृद्धि की प्राप्ति भी होती है.

चाँदी जैसा ग्रे रंग या गहरे ग्रे रँग का उपयोग भी इस नक्षत्र की शुभता में वृद्धि करता है. इस नक्षत्र के देव भगवान शिव हैं इसलिए भगवान शिव की आराधना सफेद चंदन, खुश्बूदार पुष्प, धूप, बेल पत्र, मिठाई और शुद्ध घी का दीपक जलाकर करनी चाहिए. इसके अतिरिक्त अपनी श्रद्धानुसार अन्य वस्तुओं का उपयोग भी पूजा में किया जा सकता है. दही और मिठाई का दान देकर भी इसके अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है.

पीपल की जड़ के साथ सफेद चंदन को ताबीज के रूप में बाँधकर भी इस नक्षत्र के शुभ फल बढ़ाए जा सकते हैं. शुद्ध घी और शहद को मिलाकर होम करके भी आर्द्रा नक्षत्र को बल प्रदान किया जा सकता है. होम करते हुए आर्द्रा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए. अगर होम नहीं भी करते हैं तब प्रतिदिन नियम से आर्द्रा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें जिससे कि इस नक्षत्र के शुभ फलों में वृद्धि हो और आप जीवन में सफलता अर्जित करें. आर्द्रा नक्षत्र का वैदिक मंत्र है :-

नमस्ते रूद्रमन्यवउतो त इषवे नम: ।

बाहुभ्यामुतते नम: ऊँ रुद्राय नम: शिवाय नम: ।।

 

पुनर्वसु नक्षत्र का उपचार अथवा उपायों के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :- 

https://chanderprabha.com/2019/06/09/remedies-for-punarvasu-nakshatra/

 

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