चन्द्र क्षेत्र अथवा चन्द्र पर्वत

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वैसे तो चंद्रमा को पृथ्वी का उपग्रह माना जाता है लेकिन नवग्रहों में चंद्रमा को ग्रह के रुप में स्वीकारा गया है। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे निकट होने से मनुष्य के मन पर गहरी छाप छोड़ता है। सही मायनों में इस ग्रह को सुन्दरता और कल्पना का कारक माना गया है। देखने में सुन्दर तथा सौम्य तो है ही साथ ही इसके प्रभाव से व्यक्ति कल्पनाएँ भी अधिक करता है।

हाथ में सबसे छोटी अंगुली के सबसे नीचे का हथेली का जो भाग है, जो कलाई के साथ जुड़ा क्षेत्र है वह चन्द्र क्षेत्र अथवा चन्द्र पर्वत कहलाता है। यह क्षेत्र भाग्य रेखा के नजदीक है। जिन व्यक्तियों के हाथ में चन्द्र पर्वत विकसित होता है वे व्यक्ति कोमल, रसिक तथा भावुक होते हैं। जिनके हाथों में चन्द्र पर्वत पूर्णत: उभरा हुआ होता है वे प्रकृति प्रिय तथा सौन्दर्य प्रिय होते हैं अर्थात ऎसे लोगों को प्राकृतिक सौन्दर्य से प्रेम होता है और ऎसे लोग वास्तविकता से हटकर काल्पनिकता में ज्यादा रहते हैं। जीवन में कल्पनाओं का अभाव बिलकुल भी नहीं रहता जिस कारण ये अपने आप में ज्यादा ही खोये रहते हैं और इस कारण जीवन की कठोरताओं तथा मुसीबतों को ये झेल नहीं पाते हैं। जरा-सी परेशानी आने पर ये विचलित हो जाते हैं।

ऎसे व्यक्तियों को अन्य लोग संसार के छल-कपट से दूर तथा शान्त और कल्पनामय जग में विचरण करने वाले कहते हैं। ऎसे ही व्यक्ति उत्तम कोटि के कलाकार, संगीतज्ञ और साहित्यकार होते हैं। इनके विचारों में धार्मिकता विशेष रुप से होती है। ये किसी के दबाव में आकर काम नहीं कर पाते हैं। इनके विचार भी स्वतंत्र एवं स्पष्ट होते हैं।

जिन लोगों के हाथों में चन्द्र पर्वत का अभाव होता है वे व्यक्ति कठोर हृदय तथा पूर्ण रुप से भौतिकवादी होते हैं। जो व्यक्ति सिवाय युद्ध के कुछ करते ही नहीं उनके हाथों में भी चन्द्र पर्वत का अभाव स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है। जिन हाथों में चन्द्र पर्वत अच्छी तरह से विकसित होता है वे भौतिकवादी ना होकर कल्पनाशील होते हैं। प्रेम व सौन्दर्य उनके जीवन की कमजोरी होती है परन्तु सांसारिक छल-कपट को न समझ पाने के कारण उनके प्रेमी जीवन का अन्त दु:खद होता है।

यदि किसी व्यक्ति के हाथ में चन्द्र पर्वत जरुरत से ज्यादा विकसित है तो ऎसा व्यक्ति पागल तक हो सकता है। यदि चन्द्र पर्वत मध्यम स्तर का विकसित है तब ऎसा व्यक्ति कल्पनाओं में विचरण करने वाला तथा हवाई किले बनाने वाला होता है। ऎसे व्यक्ति बैठे-बैठे ही करोड़ों की योजनाएँ बना लेते हैं लेकिन केवल ख्यालों में ही, जिसमें से पूरी एक नहीं होती। ऎसे भी कहा जा सकता है कि योजनाएँ तो बना लेते हैं लेकिन उनको पूरा करने की योग्यता अथवा साहस उनमें नहीं होता है।

ऎसे व्यक्ति जरुरत से ज्यादा भावुक होते हैं। छोटी से छोटी बात भी इनको बहुत ज्यादा चुभ जाती है। कोई छोटा-सा व्यंग्य इनके साथ कर दे तो ये पूरी तरह से हिल जाते हैं। ऎसे लोगों में संघर्ष की भावना नहीं के बराबर होती है और विपरीत परिस्थितियों में ये पलायन कर जाते हैं तथा धीरे-धीरे इनमें निराशा की भावना बढ़ जाती है।

यदि चन्द्र पर्वत विकसित होकर हथेली के बाहर की ओर झुक जाता है तो ऎसे व्यक्ति में रजोगुण की प्रधानता बन जाती है। ऎसे व्यक्ति भोगी, विषयी तथा कामी हो जाते हैं तथा सुंदर स्त्रियों के पीछे व्यर्थ चक्कर लगाते रहते हैं। इनके जीवन का ध्येय भोग-विलास तथा अय्याशी होता है लेकिन जीवन में ये सुख भी उनको नसीब नहीं होता।

यदि किसी हथेली में चन्द्र पर्वत, शुक्र पर्वत की ओर झुकता हुआ अनुभव हो तब ऎसे व्यक्ति कामुक होने के साथ निर्लज्ज भी होते हैं। इनको अपने पराए का भेद नहीं रहता, जिसके कारण ऎसे व्यक्ति समाज में बदनाम हो जाते हैं।

यदि चन्द्र पर्वत पर आड़ी टेढ़ी रेखाएं फैली हुई दिखाई दे तो ऎसा व्यक्ति कई बार जल यात्राएँ करता है। यदि चन्द्र पर्वत पर गोल घेरा हो तो व्यक्ति राजनीतिक कार्य से विदेश यात्रा करता है। यदि किसी हाथ में चन्द्र पर्वत का अभाव है तो वह व्यक्ति रूखा और पूर्णत: भौतिक होता है। जिनके हाथों में चन्द्र पर्वत सामान्य रुप से उभरा हुआ होता है वे आन्तरिक दृष्टि से अत्यधिक सुन्दर तथा समझदार होते हैं। यदि यह पर्वत ऊपर की ओर से उभरा हुआ होता है तो ऎसे व्यक्ति को गठिया अथवा जुकाम जैसे रोग बने रहते हैं।

अगर यह पर्वत जरुरत से ज्यादा विकसित है तो ऎसा व्यक्ति अस्थिर बुद्धि का, निराश, वहमी तथा लगभग पागल सा होता है। ऎसे लोगों को बराबर सिरदर्द की शिकायत रहती है। यदि यह पर्वत नीचे की ओर खिसका हुआ है तो वह व्यक्ति शक्तिहीन होता है। यदि चन्द्र पर्वत पर शंख का चिन्ह है तो ऎसा व्यक्ति अपने ही प्रयत्नों से सफल होते हैं लेकिन साथ ही उनकी सफलता में बराबर बाधाएं तथा परेशानियाँ बनी रहती है। इतना होने पर भी ऎसे व्यक्ति जीवन को सही रूप से जीने में तथा दूसरों को सहयोग व सहायता देने में विश्वास रखते हैं।

उपरोक्त पूरी चर्चा का निचोड़ ये निकलता है कि हाथ में चन्द्र पर्वत की स्थिति से ही व्यक्ति कल्पनाप्रिय, सौन्दर्यप्रिय तथा भावुक हो सकता है।  

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