दोहरी मस्तिष्क रेखा

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हाथ में दोहरी मस्तिष्क रेखा कम ही पाई जाती है. जब जब दो अलग-अलग मस्तिष्क रेखाएँ स्पष्ट रुप से दिखाई दें तो उसके प्रभाव से जातक दो स्वभावों का हो जाता है. व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियाँ दो अलग प्रवाहों में बहती हैं. व्यक्ति में मानसिक कार्य करने की असाधारण व अद्भुत मानसिक क्षमता होती है. ऎसे व्यक्ति दो प्रकार की मानसिक प्रवृत्तियों के होते हैं और अपने जीवन को सफल बनाते हैं.

अधिकाँशत: यह अनुभव किया गया है कि दो मस्तिष्क रेखाओं में से एक तो जीवन रेखा से जुड़ी होती है और दूसरी मस्तिष्क रेखा का आरंभ बृहस्पति क्षेत्र से होता है.जब ऎसा योग हाथ में हो तब समझना चाहिए कि एक तरफ तो जातक आवेशात्मक और सतर्क स्वभाव का है और दूसरी ओर अपने अपूर्व आत्मविश्वास तथा बौद्धिक विकास द्वारा उच्चतम प्रशासनिक पद प्राप्त करने की महत्त्वाकांक्षा रखता है. ऎसे व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति द्वारा समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करते हैं.

हस्तरेखाशास्त्रियों का मत है कि यद्यपि दो मस्तिष्क रेखाएँ मानसिक क्षमता तो असाधारण रुप से देती हैं, लेकिन यदि दो के स्थान पर एक ही सुस्पष्ट व बलवती मस्तिष्क रेखा हो तो उसको अधिक सुफलदायक समझना चाहिए. दोहरी मस्तिष्क रेखा का एक दूसरा रुप भी है, इसमें मुख्य मस्तिष्क रेखा करतल के मध्य में आकर विभाजित हो जाती है और एक शाखा करतल को पार कर जाती है तो दूसरी शाखा चन्द्र क्षेत्र की ओर चली जाती है. ऎसी परिस्थिति में जातक में दो स्वतंत्र मानसिक व्यक्तित्व उत्पन्न हो जाते हैं.

प्राचीन हस्तरेखा शास्त्रियों का मानना है कि जब दो स्पष्ट मस्तिष्क रेखाएँ हों तो जातक को विरासत में धन-सम्पत्ति प्राप्त होती है. इसमें कीरो ने अपने अनुभव से यह स्पष्ट किया है कि यद्यपि इस प्रकार के योग में जातक के पास बहुत धन-सम्पत्ति होती है लेकिन वह उसको विरासत में नहीं मिलती है अपितु वह उस सम्पत्ति को अपनी बौद्धिक क्षमता द्वारा अर्जित करता है.  

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