स्कन्द पुराणोक्त शनि स्तोत्र

शनि कई बार गोचरवश अथवा अपनी दशा/अन्तर्दशा में कष्ट प्रदान करते हैं, ऎसे में जातक को घबराने की बजाय शनि महाराज को प्रसन्न करने के विषय में सोचना चाहिए ताकि वह अपने अशुभ प्रभावों में कमी कर सकें. वैसे तो शास्त्रों में शनि संबंधित बहुत से मंत्र, कवच अथवा स्तोत्र दिए गए हैं लेकिन यहाँ…

तुलसीदासकृत हनुमानाष्टक

तत: स तुलसीदास: सस्मार रघुनन्दनं । हनुमन्तं तत्पुरस्तात् तुष्टाव भक्त रक्षणं ।।1।।   धनुर्वाणो धरोवीर: सीता लक्ष्मण संयुत: । रामचन्द्र सहायो मां किं करिष्यत्ययं मम ।।2।।   हनुमान् अंजनीसूनुर्वायुपुत्र महाबल: । महालाड्गूल चिक्षपेनिहताखिल राक्षस: ।।3।।   श्रीरामहृदयानन्द विपत्तौ शरणं तव । लक्ष्मणो निहते भूमौ नीत्वा द्रोणचलं यतम्।।4।।   यथा जीवितवानद्य तां शक्तिं प्रच्चटी कुरु ।…

दशरथकृत शनि स्तवन

  शनि की पीड़ा से मुक्ति के अकसर लिए दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने का परामर्श दिया जाता है. यदि इस शनि स्तोत्र के साथ दशरथकृत शनि स्तवन का पाठ भी किया जाए तो अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है. यहाँ स्तवन का तात्पर्य – अत्यन्त विनम्र भाव से पूरी तरह समर्पित होकर शनि देव…

श्रीशनि व शनिभार्या स्तोत्र

  श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र एक दुर्लभ पाठ माना गया है, शनि के अन्य स्तोत्रों के साथ यदि इस दुर्लभ स्तोत्र का पाठ भी किया जाए तो खोया हुआ साम्राज्य भी पुन: प्राप्त किया जा सकता है. राजा नल ने इस श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र का नियमित रुप से पाठ किया और अपना छीना हुआ…

शनि कवच

शनि ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए अनेकानेक मंत्र जाप, पाठ आदि शास्त्रों में दिए गए हैं. शनि ग्रह के मंत्र भी कई प्रकार हैं और कवच का उल्लेख भी मिलता है. युद्ध क्षेत्र में जाने से पूर्व सिपाही अपने शरीर पर एक लोहे का कवच धारण करता था ताकि दुश्मनों के वार से…

श्रीशनि वज्रपंजर कवच

आधुनिक समय में हर व्यक्ति शनि के नाम से भयभीत रहता है. इसका कारण शनि के विषय में फैली गलत भ्राँतियाँ भी हैं. शनि ग्रह किसी व्यक्ति को कैसे फल देगा, ये जन्म कुंडली में शनि की स्थिति तथा योगों पर निर्भर करता है. कई बार योगकारी होते भी अपनी दशा/अन्तर्दशा में शनि पूरे फल…

श्रीगणपतिनमस्कार:

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषितायगौरीसुताय गणनाय नमो नमस्ते।।1।। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।।2।। एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्। विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम।।3।। रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षक। भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्।।4।। ।।इति श्रीगणपतिनमस्कार: सम्पूर्ण:।।

देवीस्तुति:

देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके अनेको रुपों को बारम्बार नमस्कार किया गया है.  इस देवीस्तुति का नित्य पाठ करने से व्यक्ति पर महादेवी की कृपा सदा बनी रहती है, वैसे भी माँ अपने भक्त की पुकार सुनकर शीघ्र ही पिघल जाती है. ध्यानम् – Dhyanam…

रेवती नक्षत्र और व्यवसाय

  रेवती नक्षत्र का विस्तार मीन राशि में 16 अंश(Degree) 40 कला(Minute) से लेकर 30 अंश तक रहता है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र के अन्तर्गत सम्मोहन करने वाले, प्रेतों से संपर्क साधने वाले, कलाकार जैसे – चित्रकार, अभिनेता, नट, विदूषक, संगीतज्ञ आते हैं, भाषाविद, जादूगर, घड़ी साज, रेल…

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का विस्तार मीन राशि में 3 अंश 20 कला से लेकर 16 अंश 40 कला तक रहता है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र में ध्यान तथा योग कराने वाले विशेष व्यक्ति आते हैं. रोग निदान व चिकित्सा विशेषज्ञ, सलाहकार, आध्यात्मिक चिकित्सक, तांत्रिक, दिव्य पुरुष, योगी, तपस्वी, वन…

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का विस्तार कुंभ राशि में 20 अंश से आरंभ होकर मीन राशि में 3 अंश 20 कला तक रहता है. इस नक्षत्र कके अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र में दाह संस्कार अथवा मृत्यु व मृतक संस्कार से जुड़े सारे लोग आते हैं जैसे कफन बेचने तथा बनाने वाले, शव वाहन…

शतभिषा नक्षत्र और व्यवसाय

शतभिषा नक्षत्र का विस्तार कुंभ राशि में 6 अंश(Degree) 40 कला(Minute) से 20 अंश तक रहता है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत आने वाले व्यवसाय निम्नलिखित हैं :- इस नक्षत्र में बिजली का काम करने वाले कारीगर, इलैक्ट्रिशियन, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ(Technology Expert), रडार तथा “क्ष” किरण(X-Ray) विशेषज्ञ, कीमोथेरेपी वाले चिकित्सक, अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष विज्ञानी, अंतरिक्ष की खोज,…