तुलसीदासकृत हनुमानाष्टक

तत: स तुलसीदास: सस्मार रघुनन्दनं । हनुमन्तं तत्पुरस्तात् तुष्टाव भक्त रक्षणं ।।1।।   धनुर्वाणो धरोवीर: सीता लक्ष्मण संयुत: । रामचन्द्र

पढ़ना जारी रखें

श्रीशनि व शनिभार्या स्तोत्र

  श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र एक दुर्लभ पाठ माना गया है, शनि के अन्य स्तोत्रों के साथ यदि इस दुर्लभ

पढ़ना जारी रखें

श्रीगणपतिनमस्कार:

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषितायगौरीसुताय गणनाय नमो नमस्ते।।1।। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।।2।। एकदन्तं महाकायं

पढ़ना जारी रखें