सूर्य दशाफल

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सूर्य महादशा के फल – Results Of Sun Mahadasha

यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य की महादशा आरंभ हो गई है तब उसे इस समय में गोपनीय विधि से धनागम हो सकता है लेकिन अग्नि अथवा पशु से भय भी बना रह सकता है. उदर (पेट) तथा दाँतों संबंधी रोग जकड़ सकते हैं. पत्नी तथा बच्चों से वियोग हो सकता है. पिता, गुरुजनों अथवा भाईयों से अनबन तथा उनके साथ कलह हो सकता है. पशु हानि हो सकती है और जिनके पास पशु धन नहीं है उन्हें वित्तीय हानि हो सकती है.

 

सूर्य अन्तर्दशा फल – Results Of Sun Anterdasha

जातकों की कुंडली में सूर्य की अन्तर्दशा आने पर उन्हें प्रवास करना पड़ सकता है. व्यक्ति इस समय वाचाल रहने के साथ युद्ध अथवा विवाद से चिन्तित रह सकता है. ऋण आदि से ग्रस्त हो सकता है. नेत्र, उदर अथवा दाँत संबंधी विकार घेर सकते हैं. स्वजनों से पीड़ा हो सकती है अथवा स्त्री-संतान संबंधी परेशानी अथवा इनसे वियोग भी हो सकता है. इस समय मन में क्षोभ बना रह सकता है. स्वजन विरोधियों का काम कर सकते हैं. उद्वेग, रोगों से कष्ट अथवा धन की हानि हो सकती है. कुंडली में सूर्य पीड़ित हो तो इसकी दशा/अन्तर्दशा में ह्रदय संबंधी रोग होने की संभावना बन सकती है.

राजा अथवा सरकार से धन लाभ हो सकता है, ब्राह्मण, अग्नि, भूमि, शस्त्र, औषध आदि से संबंधित धन लाभ हो सकता है. राजा अथवा सरकारी उच्चाधिकारियों से मित्रता हो सकती है. धार्मिक प्रवृति से युक्त रह सकता है. व्यक्ति मन्त्राभिचार में रत रह सकता है. इस समय महत्वपूर्ण कार्य संपादित करने की प्रवृति व्यक्ति की रहती है.

 

परमोच्च सूर्य दशा के फल – Results Of Extreme Exalted Sun Dasha

जन्म कुंडली में सूर्य यदि परमोच्च अंशों पर स्थित है तब भूमि से लाभ हो सकता है, धन की प्राप्ति हो सकती है, स्त्री से लाभ, संतान सुख अथवा पुत्र रत्न की प्राप्ति हो सकती है. इस समय व्यक्ति की कीर्त्ति पताका चारों दिशाओं में फैल सकती है. शौर्य बढ़ता है. राजा अथवा सरकार से सम्मान मिलता है. व्यक्ति विनोद गोष्ठियों से सुख का लाभ पाता है.

 

उच्च राशि में स्थित सूर्य दशाफल – Results Of Exalted Sun Dasha 

उच्च राशि में स्थित सूर्य की दशा में व्यक्ति धन-धान्य का लाभ पाता है. सुख-संपदा की प्राप्ति होती है लेकिन बंधु-बांधवों से विरोध रहता है. इस समय देश-विदेश में भ्रमण करने के अवसर मिल सकते हैं. प्रचण्द रुप से वेश्यागामी हो सकता है. राजा अथवा सरकार से वृत्ति प्राप्त करने वाला तथा रति क्रीड़ा में पटु होता है. व्यक्ति मृदंग-भेरी आदि वाद्य यंत्रों से युक्त यान का सुख पाने वाला होता है लेकिन परस्पर विरोध भी बना रहता है.

 

आरोही-अवरोही सूर्य का दशाफल – Results Of Aarohi/Avarohi Sun Dasha

जन्म कुंडली में सूर्य यदि आरोहिणी अवस्था में स्थित है तब व्यक्ति सुखी तथा परोपकारी होता है. स्त्री तथा पुत्रों से युत होता है, भूमि तथा गोधन से सुखी होता है. हाथी, घोड़ो आदि से भी युत रहता है और कृषि कर्म अथवा कृषि संबंधी काम करने वाला होता है.

जन्म कुंडली में सूर्य यदि अवरोहिणी अवस्था में स्थित है तब व्यक्ति जो भी काम करता है अधिकाँश में हानि ही हाथ लगती है. चोरों तथा अग्नि से भय बना रहता है, कलह-क्लेश सदा बना रहता है. स्वजनों अथवा स्वगोत्रियों से विरोधाभास रहता है और राजकोप का भी भय रहता है.

 

मूलत्रिकोण/स्वगृही सूर्य का दशाफल – Results Of Mooltrikon/Own Sign Sun Dasha

जन्म कुंडली में सूर्य यदि मूल त्रिकोण राशि में स्थित है तब सूर्य की दशा/अन्तर्दशा में स्त्री, पुत्र, भूमि, धन आदि का सुख मिलता है. बंधु-बाँधवों द्वारा भी सुख की प्राप्ति होने की संभावना बनती है. राज्याश्रय, मित्र और गोधन की उपलब्धि हो सकती है. अपना घर तथा वाहन आदि का सुख भी मिल सकता है. सरकार से लाभ के योग भी बनते हैं.

जन्म कुंडली में सूर्य यदि स्वगृही है तब इसकी दशा में भाईयों का सुख मिल सकता है. व्यापार अथवा कृषि कर्म से लाभ हो सकता है. जातक की कीर्ति दूर तक फैलती है. विद्या लाभ, यश प्राप्ति, राज सम्मान तथा स्वभूमि का लाभ प्राप्त होता है.

 

अतिमित्र/मित्र राशिस्थ सूर्य दशाफल – Results Of Sun Dasha In Friendly Sign

यदि जन्म कुंडली में सूर्य अतिमित्र राशि में स्थित है तब इसकी दशा/अन्तर्दशा सुखकर सिद्ध होती है. यह दशा जातक को धन, पुत्र, वाहन, वस्त्र तथा आभूषण प्रदान करने वाली हो सकती है. व्यक्ति मनोविलास भी इस दशा में पा सकता है.

जन्म का सूर्य यदि मित्र राशि में स्थित है तब अपनी दशा/अन्तर्दशा मे जातक को भाईयों का सुख देने वाला होता है. पुत्र तथा मित्रों की ओर से भी सुख की प्राप्ति होती है. घर का सुख, वाहनादि का सुख, ताम्र आदि से लाभ होता है. इस समय स्वजनों की संगति में व्यक्ति ज्यादा समय बिताता है.

 

सम/शत्रुराशि स्थित सूर्य दशाफल – Results Of Sun In Neutral Sign

सम राशि में स्थित सूर्य की दशा में व्यक्ति को कृषि, भूमि तथा धन-धान्यादि का सामान्य सुख मिलता है. गाय, घोड़े, वाहन, वस्त्र आदि का सामान्य से कुछ अधिक लाभ मिलता है. दैहिक सुख की प्राप्ति भी इस समय होती है. जातक की स्त्री तथा पुत्र दूषित रह सकते हैं और जातक स्वयं भी किसी ना किसी युद्ध अथवा विवाद आदि में फंसा रह सकता है.

यदि जन्म कुंडली में सूर्य शत्रु राशि में स्थित है तब इसकी दशा में व्यक्ति दुखी रहता है. इसका पुत्र तथा स्त्री दोनो भ्रष्ट हो सकते हैं. राजा अथवा सरकार से कष्ट, आग व चोरों का भय बना रह सकता है, इनसे विपत्ति आ सकती है. किसी ना किसी से विवाद बना रह सकता है और सूर्य की जाती हुई दशा में पिता से विरोध हो सकता है.

 

अतिशत्रु राशि स्थित सूर्य दशाफल – Results Of Sun In Atishatru(Enemy) Sign 

जन्म कुंडली में सूर्य यदि अति शत्रु राशि में स्थित है तो इसकी दशा में स्त्री-पुत्र आदि की हानि होने की संभावना बन सकती है. पिता तथा मित्र आदि को शारीरिक कष्ट की प्राप्ति भी इस समय हो सकती है. किसी ना किसी कारण से धन हानि के योग भी सूर्य की दशा/अन्तर्दशा में बन जाते हैं.

 

शुभ ग्रहों से युत सूर्य का दशाफल – Results Of Sun With Beneficial Planets

जन्म कुंडली में सूर्य यदि शुभ ग्रहों के साथ स्थित है तब व्यक्ति को भूमि लाभ तथा धन लाभ के अवसर मिलते हैं. वस्त्रादि का सुख भी प्राप्त होता है. अपने प्रिय अथवा प्रियतम के साथ विलास का सुख भी मिलता है. समाज में वाणी-विलास तथा गोष्ठी आदि का सुख भी मिलता है और व्यक्ति का हर ओर से कल्याण होता है.

 

पाप ग्रहों से युत सूर्य का दशाफल – Results Of Sun With Malefic Planets

पाप ग्रहों से युत सूर्य की दशा में व्यक्ति हीनवृत्ति से नित्य मानसिक संताप पाता है. कुत्सित भोजन करता है. पान तथा वस्त्रादि का भोग करना और हीन वृत्ति से धन प्राप्त करता है. इस समय व्यक्ति शारीरिक रुप से कृशता पाता है.

 

नीच सूर्य का दशाफल – Results Of Debilitated Sun Dasha 

यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में नीच राशि का सूर्य हो तब इसकी दशा/अन्तर्दशा में कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ सकता है. राजा अथवा सरकार के कोप का भय बना रह सकता है. मान, प्रतिष्ठा तथा धन की हानि होने के योग इस समय बन सकते हैं. स्वजनों अथवा बंधु-बांधवों से भी हानि अथवा उनका नाश हो सकता है. पुत्र, मित्र अथवा स्त्री द्वारा पिता अथवा वरिष्ठजनों आदि की अपकीर्ति की जा सकती है.

यदि सूर्य परम नीच अंशों पर स्थित है तब अनेक प्रकार की आपदाओं से व्यक्ति घिरा रह सकता है. घर से दूर जाना पड़ सकता है, यहाँ तक की कई बार गृह त्याग की नौबत भी आ सकती है. विदेश जाना हो सकता है, गुरुजनों अथवा वरिष्ठजनों का निधन भी हो सकता है. गोधन, भूमि तथा कृषि का नाश होने की संभावना भी बन सकती है.

 

शुभ ग्रहों से दृष्ट सूर्य का दशाफल – Results Of Sun Aspected By Beneficial Planets

जन्म कुंडली में सूर्य यदि शुभ ग्रहों से दृष्ट है तो इसकी दशा में व्यक्ति को स्त्री-पुत्र का सुख, यश, विद्या, वाग्विलास की प्राप्ति, प्रताप में वृद्धि, पिता का सुख, सरकार से लाभ मिलता है.

 

पाप दृष्ट सूर्य दशा का फल – Results Of Sun Aspected By Malefic Planets

सूर्य यदि पाप ग्रहों से दृष्ट है तब अपनी दशाभुक्ति में बहुत कष्ट प्रदान करता है. पिता से बिछोह अथवा उनकी मृत्यु, स्त्री-पुत्र को कष्ट, चोर व अग्नि भय तथा राजकोप अथवा सरकार विपन्नता होती है.

 

उच्च-नीच नवाँश स्थित सूर्य दशाफल – Results Of Sun In Exalted/Debilitated Navansha

नवाँश कुंडली में सूर्य यदि उच्च नवाँश में स्थित है तब सूर्य की दशा में व्यक्ति अपने पराक्रम से आजीविका पाता है और अपने पराक्रम के बल पर ही धन व सम्मान को पाता है. व्यक्ति रतिसुख पाता है और अनेको प्रकार के विनोद से युक्त होता है. उसे नित-प्रतिदिन स्त्री और वस्त्र का लाभ होता है लेकिन पितृवर्ग की हानि होती है.

नवाँश कुंडली में सूर्य यदि अपने नीच नवाँश में स्थित है तब अपनी दशा में धन, पुत्र, स्त्री तथा भूमि की हानि कराता है. व्यक्ति कुत्सित मनोविकारों से युक्त हो जाता है, स्वजनों द्वारा व्यक्ति का परित्याग कर दिया जाता है. ज्वर अथवा मधुमेह आदि भयंकर रोगों से घिर सकता है.

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