प्रदोष व्रत 2018

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प्रदोष

 

दिनाँक (Dates) दिन (Days) हिन्दु माह (Hindu Month)
14 जनवरी रविवार माघ कृष्ण पक्ष
29 जनवरी सोमवार माघ शुक्ल पक्ष-सोम प्रदोष
13 फरवरी मंगलवार फाल्गुन कृष्ण पक्ष-भौम प्रदोष
27 फरवरी मंगलवार फाल्गुन शुक्ल पक्ष-भौम प्रदोष
14 मार्च बुधवार चैत्र कृष्ण पक्ष
29 मार्च बृहस्पतिवार चैत्र शुक्ल पक्ष
13 अप्रैल शुक्रवार वैशाख कृष्ण पक्ष
27 अप्रैल शुक्रवार वैशाख शुक्ल पक्ष
13 मई रविवार प्रथम शुद्ध ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष
26 मई शनिवार प्रथम अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष
11 जून सोमवार द्वितीय अधिक ज्येष्ठ – कृष्ण पक्ष – सोम प्रदोष
25 जून सोमवार द्वितीय शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष – सोम प्रदोष
10 जुलाई मंगलवार आषाढ़ कृष्ण पक्ष – भौम प्रदोष
25 जुलाई बुधवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष
9 अगस्त बृहस्पतिवार श्रावण कृष्ण पक्ष
23 अगस्त बृहस्पतिवार श्रावण शुक्ल पक्ष
7 सितंबर शुक्रवार भाद्रपद कृष्ण पक्ष
22 सितंबर शनिवार भाद्रपद शुक्ल पक्ष-शनि प्रदोष
6 अक्तूबर शनिवार आश्विन कृष्ण पक्ष-शनि प्रदोष
22 अक्तूबर सोमवार आश्विन शुक्ल पक्ष-सोम प्रदोष
5 नवंबर सोमवार कार्तिक कृष्ण पक्ष-सोम प्रदोष
20 नवंबर मंगलवार कार्तिक शुक्ल पक्ष-भौम प्रदोष
4 दिसंबर मंगलवार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष-भौम प्रदोष
20 दिसंबर बृहस्पतिवार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष
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3 टिप्पणियाँ अपनी जोड़ें

  1. संतोष नागरे कहते हैं:

    प्रदोष व्रत कोणसे दिन से करणा होता हे और ये दिन मे क्या खाना होता हे निर्जल यानी दिनभर या सुर्यास्त से रात तक कृपया मार्गदर्शन करे

  2. Chander Prabha कहते हैं:

    कहा तो यही गया है कि प्रदोष व्रत में बिना जल पीए व्रत रखना होता है। सुबह स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। शिवजी की षोडशोपचार (16 सामग्रियों से) पूजा करें। भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जप करें। रात्रि में जागरण करें।

    वैसे आप अपने घर के नजदीक किसी पंडित जी से जाकर पूछे कि क्या करना चाहिए क्योंकि व्रत रखने का अर्थ तो एक ही होता है लेकिन स्थान के हिसाब से रखने का तरीका थोड़ा भिन्न हो जाता है। जैसे शिवरात्रि का व्रत भी भोले शंकर के लिए है लेकिन मैने देखा है कि हिन्दुस्तान में उसे कई तरीको से रखा जाता है. कुछ दिन भर व्रत रखकर शाम को भोजन कर लेते हैं तो कुछ स्थान पर रात भर जागकर पूजा तथा व्रत किया जाता है। इसलिए बेहतर है कि आप जिस क्षेत्र से संबंध रखते हैं तो वहाँ के नियमो के अनुसार इस प्रदोष व्रत का पालन करें।

  3. ram digari कहते हैं:

    जै शिव शंकर में भी व्रत करता हूँ महादेव कि किरपा सें सुखी रहता हूँ

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