विद्या प्राप्ति के मंत्र

कई बार परिस्थितियाँ कुछ ऎसी हो जाती है कि बच्चा पढ़ाई में पिछड़ने लगता है. माता-पिता के लिए यह एक तनाव का विषय बन जाता है. ऎसे में कुंडली में उस ग्रह की शांति तो करानी ही चाहिए जिसकी वजह से पढ़ाई में रुकावट आ रही हो, साथ ही विद्या प्राप्ति के जो अलग से मंत्र दिए गए हैं वह भी नियमित रुप से करने चाहिए जिसके परिणामस्वरुप बच्चे को अनुकूल फलों की प्राप्ति शीघ्र ही होगी.

विद्या प्राप्ति के साथ बच्चे का बौद्धिक विकास भी इन मंत्रों के करने से होगा. वैसे तो वैदिक परंपरा में विद्या प्राप्ति के लिए गायत्री मंत्र की महिमा का जिक्र किया गया है लेकिन तंत्रागम में शिक्षा से संबंधित सभी समस्याओं से निजात पाने के लिए सरस्वती मंत्र के साथ शिव के मंत्रो की उपयोगिता का उल्लेख मिलता है. दोनों ही प्रकार के मंत्रो को आप अपने बच्चों को करने के लिए कह सकते हैं और यदि बच्चा अभी छोटा है या मंत्र जाप में आनाकानी करता है तब बच्चे के माता-पिता इसे कर सकते हैं.

सरस्वती मंत्र

  • वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
  • ऎं नम: भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा
  • ऊँ ह्रीं ऎं ह्रीं सरस्वत्यै नम:
  • ऊँ ह्रीं हसौ: ऊँ सरस्वत्यै नम:
  • ऊँ ऎं ह्रीं सरस्वत्यै नम

उपरोक्त किसी भी एक मंत्र का चयन आप कर सकते हैं और इसे प्रतिदिन सुबह के समय 108 बार किया जाना चाहिए. यदि बच्चा स्वयं इतने ज्यादा मंत्र का जाप नहीं कर सकता तो आप खुद करें और बच्चे को आदत दालें कि वह अपनी पुस्तक अथवा कापी खोलने से पूर्व इनमें से किसी भी एक मंत्र को पाँच बार दोहराए.

यदि विधिवत तरीके से इस मंत्र का जाप किया जाए तब फलों की प्राप्ति जल्दी व अनुकूल मिल सकती है. आप किसी भी शुभ मुहूर्त में या शुक्ल पक्ष के किसी शुभ दिन में अपनी नित्य क्रियाओं से निपटकर स्नान आदि करने के बाद आचमन व प्राणायाम कर सरस्वती यंत्र की स्थापना करें. उसका पंचोपकार अथवा षोडशोपचार से पूजन कर सरस्वती मंत्र का प्रतिदिन जाप करें.

इन मंत्रों के अनुष्ठान के साथ यदि सिद्धसारस्वतस्तोत्र, नीलसरस्वती स्तोत्र अथवा सरस्वती अष्टक का पाठ भी किया जाए तो लाभ शीघ्र मिलेगा.

विद्या प्राप्ति के लिए शिव – मंत्र

  • ऊँ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रयच्छ स्वाहा
  • ऊँ नमो भगवते परमशिवाय सुबुद्धि कुरु कुरु स्वाहा
  • ऊँ ह्रीं दक्षिणामूर्तये तुभ्यं वटमूलनिवासिने । ध्यानैकनिरतांगाय नमोरुद्राय शम्भवे ह्रीं ऊँ ।।

वैसे उपरोक्त शिव मंत्रों का जाप किसी शिवालय में या एकान्त में या किसी निर्जन स्थान पर विधिवत रुप से नर्मदेश्वर, पार्थिदेश्वर या अन्य शिवलिंग की पूजा कर के उपरोक्त मंत्र में से किसी एक का जप करना चाहिए. इन मंत्रों की जप संख्या एक लाख होती है. इन मंत्रों के अनुष्ठान के साथ शिव शतनाम, शिवसहस्त्रानामस्तोत्र या शिवमहिम्न स्तोत्र का पाठ करने से लाभ अधिक होता है.

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