कार्तिक माह माहात्म्य – पंद्रहवाँ अध्याय

श्री विष्णु भगवान की कृपा, हो सब पर अपरम्पार। कार्तिक मास का ‘कमल” करे पन्द्रहवाँ विस्तार।। राजा पृथु ने नारद

पढ़ना जारी रखें

कार्तिक माह माहात्म्य – बारहवाँ अध्याय

सुख भोगे जो कथा, सुने सहित विश्वास। बारहवाँ अध्याय लिखे, ‘कमल’ यह दास।। नारद जी ने कहा – तब इन्द्रादिक

पढ़ना जारी रखें

कार्तिक माह माहात्म्य – ग्यारहवाँ अध्याय

जिसको जप कर जीव, हो भवसागर से पार। ग्यारहवें अध्याय का, ‘कमल’ करे विस्तार।। एक बार सागर पुत्र जलन्धर अपनी

पढ़ना जारी रखें