कार्तिक माह माहात्म्य – तेरहवाँ अध्याय

कार्तिक कथा को सुनो, सभी सहज मन लाय। तेरहवाँ अध्याय लिखूँ, श्री प्रभु शरण में आय।। दोनो ओर से गदाओं,

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