कार्तिक माह माहात्म्य – छब्बीसवाँ अध्याय

कार्तिक मास माहात्म्य का छब्बीसवाँ अध्याय। श्री विष्णु की कृपा से, आज तुमको रहा बताय।। नारद जी बोले – इस

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कार्तिक माह माहात्म्य – पच्चीसवाँ अध्याय

सुना प्रश्न ऋषियों का और बोले सूतजी ज्ञानी। पच्चीसवें अध्याय में सुनो, श्री हरि की वाणी।। तीर्थ में दान और

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कार्तिक माह माहात्म्य – चौबीसवाँ अध्याय

लिखवाओ से निज दया से, सुन्दर भाव बताकर। कार्तिक मास चौबीसवाँ अध्याय सुनो सुधाकर।। राजा पृथु बोले – हे मुनिश्रेष्ठ!

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कार्तिक माह माहात्म्य – तेईसवाँ अध्याय

तेईसवाँ अध्याय वर्णन आँवला तुलसी जान। पढ़ने-सुनने से ‘कमल’ हो जाता कल्यान।। नारद जी बोले – हे राजन! यही कारण

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