कार्तिक माह माहात्म्य – पच्चीसवाँ अध्याय
सुना प्रश्न ऋषियों का और बोले सूतजी ज्ञानी। पच्चीसवें अध्याय में सुनो, श्री हरि की वाणी।। तीर्थ में दान और
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सुना प्रश्न ऋषियों का और बोले सूतजी ज्ञानी। पच्चीसवें अध्याय में सुनो, श्री हरि की वाणी।। तीर्थ में दान और
लिखवाओ से निज दया से, सुन्दर भाव बताकर। कार्तिक मास चौबीसवाँ अध्याय सुनो सुधाकर।। राजा पृथु बोले – हे मुनिश्रेष्ठ!