आरती श्रीराम जन्म की
भये प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौशिल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनिमन हारी, अदभुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा, तनु घनश्यामा, निज आयुध भुजचारी।
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भये प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौशिल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनिमन हारी, अदभुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा, तनु घनश्यामा, निज आयुध भुजचारी।
इस पाठ की एक माला प्रतिदिन करने से मनोकामना पूर्ण होती है, ऎसा माना गया है. रघुपति राघव राजाराम ।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं. नव कंजलोचन, कंज – मुख, कर – कंज, पद कंजारुणं.. कंन्दर्प
आरती श्री रामायणजी की.. कीरति कलित ललित सिय पी की.. गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद.. बालमीक बिग्यान बिसारद.. सुक सनकादि सेष