गोविन्दाष्टकम्

चिदानन्दाकारं श्रुतिसरससारं समरसं निराधाराधारं भवजलधिपारं परगुणम्। रमाग्रीवाहारं व्रजवनविहारं हरनुतं सदा तं गोविन्दं परमसुखकन्दं भजत रे।।1।।   महाम्भोधिस्थानं स्थिरचरनिदानं दिविजपं सुधाधारापानं

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आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की

आरती श्रीकृष्ण कन्हैया की, मथुरा-कारागृह-अवतारी, गोकुल जसुदा-गोद-विहारी, नंदलाल नटवर गिरिधारी, वासुदेव हलधर-भैया की ।। आरती ।। मोर-मुकुट पीताम्बर छाजै, कटि

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