विष्णु जी 108 नामावली
1) ऊँ श्री विष्णवे नम: 2) ऊँ श्री परमात्मने नम: 3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम: 4) ऊँ श्री क्षेत्र
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1) ऊँ श्री विष्णवे नम: 2) ऊँ श्री परमात्मने नम: 3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम: 4) ऊँ श्री क्षेत्र
1) ऊँ श्री गणेश्वराय नम: 2) ऊँ श्री गणाध्यक्षाय नम: 3) ऊँ श्री गणप्रियाय नम: 4) ऊँ श्री गणनाथाय नम:
ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्। य: प्रयाति त्यजन्देह स याति परमां गतिम्।।1।। स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च । रक्षांसि भीतानि
तत: स तुलसीदास: सस्मार रघुनन्दनं । हनुमन्तं तत्पुरस्तात् तुष्टाव भक्त रक्षणं ।।1।। धनुर्वाणो धरोवीर: सीता लक्ष्मण संयुत: । रामचन्द्र
शनि की पीड़ा से मुक्ति के अकसर लिए दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने का परामर्श दिया जाता है.