शनि सहस्त्रनाम स्तोत्र
जब कभी शनि की दशा/अन्तर्दशा में अकारण चिन्ताएँ होने लगे अथवा कार्य बाधा होने लगे तब श्रद्धा तथा विश्वास के
Astrology, Mantra and Dharma
जब कभी शनि की दशा/अन्तर्दशा में अकारण चिन्ताएँ होने लगे अथवा कार्य बाधा होने लगे तब श्रद्धा तथा विश्वास के
रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं शिंजिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्। क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:।।1।। पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्। भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं
इस स्तोत्र के जाप से पूर्व हनुमान जी के चित्र का इंतजाम कर लेना चाहिए क्योंकि उनके चित्र अथवा मूर्त्ति
शनि कई बार गोचरवश अथवा अपनी दशा/अन्तर्दशा में कष्ट प्रदान करते हैं, ऎसे में जातक को घबराने की बजाय शनि
श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र एक दुर्लभ पाठ माना गया है, शनि के अन्य स्तोत्रों के साथ यदि इस दुर्लभ
“भविष्य पुराण” में शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र का उल्लेख किया गया है. जो भी व्यक्ति अथवा साधक इस स्तोत्र का नियमित